1. इकाई में भार

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प्रश्न : वस्तु के रूप में मात्रा, भार, आकर्षण बल, विकर्षण बल और प्रत्याकर्षण बल क्या है?

उत्तर : ये बहुत अच्छी chapter है। उत्तर की आवश्यकता होना चाहिए, आवश्यकता के आधार पर उत्तर होगी। आवश्यकता नहीं तो उत्तर कायकी? उस आधार पर हम कुछ बातों को आवश्यकता के कक्ष में हमको नहीं महसूस होने से कुछ बातों को हमने नहीं देखा है। क्या देखने की ज़रूरत नहीं पड़ा? परमाणुओं की संख्याओं को गिनने की। ये जरूर है, परमाणुओं का प्रजातियाँ सही है, परमाणुओं का क्रिया सही है, स्थितियाँ बहुत सुस्पष्ट है, इससे चारों अवस्थाएँ कैसा घटित होती है, घटित हुआ है, इसमें हम सुस्पष्ट हैं, तो सहअस्तित्व की वैभव है ये। ये भाग में हमको बहुत अच्छा लगा और दूसरा ये बहुत अच्छी भाग है। भार को पहले समझ लीजिए।

परमाणु में भार का जो भाग है, वो मध्यांश ही है। वो मध्यांश के चलते अणु बंधन में आता है, अणु बंधन में आ करके अणुऐं जितना पास में हो पाते हैं, कितना दूर-दूर में रह करके एक ढेमा बनते हैं, एक बहुत भारी आकार बन जाते हैं, ये सब अलग-अलग बनता है। आप झाड़-पौधे में भी देखेगें, बहुत ठोस लकड़ी भी होता है, बहुत हल्की लकड़ी भी होती है, उसका रचना में porosity ज्यादा रहता है। एक अणु दूसरे अणु के बीच में दूरियाँ ज्यादा रहता है, ये ही porosity है। क्या बात है, क्या बात है! इसको आप लोग spectrum कहते हैं, अणुओं के परस्परता में जो तानाबाना को। तानाबाना एक दूसरे से थोड़ा सा दूर रहने से बीच में क्या चीज़ रहेगी? यही सत्ता, दूसरा कोई नहीं और दूसरे में कम जगह रहता है, वो दूरी कम रहता है, इसके बावजूद भी अलग होने के स्थिति में ही रहते हैं ये सब। इसी विधि से विखंडन सफल हुआ।

विखंडन विधि जो मनुष्य को हाथ लगी, जो बच्चों के लिए परिकल्पना आती है विखंडित करने का, वो कल्पना सार्थक हो गई। उससे जो उपकार हुआ, उपकर हुआ, जो अपकार हुआ, अपकार हुआ, दोनों घटित हो चुका है, उसके बारे में आप और हम कुछ नहीं कर पायेंगे। दोनों demarcated हैं। आगे दुर्घटना के स्थान पर सद्घटना के साथ हम चलने की आवश्यकता है, चाहे विज्ञानी हो, विज्ञानियों का विज्ञानी हो। उनकों भी ऐसे ही आवश्यकता है। इस बात में हम बहुत स्पष्ट हैं।अभी भार का जो आधार है परमाणुओं का मध्यांश। परमाणुओं से रचित रचना का भार, परस्परता की बात, एक बड़े रचना, छोटे रचना। जैसे ये धरती सबसे बड़ा रचना और हर पत्थर कंकड़ छोटे रचना, इस धरती के साथ भार का प्रदर्शन करता है। इकाई का परस्परता में भार, एक बड़ी चीज़, एक छोटे चीज़। उसका ज्वलंत उदाहरण धरती, धरती में जितने भी वस्तु है, वो सब धरती से छोटे हैं। धरती के आधार पर ये हर छोटे वस्तु अपना भार प्रदर्शन करते हैं। जबकि धरती शून्याकर्षण में है। ये धरती space में तैर रहा है कि उसमें खम्बा लगा रखे हो? स्पेस मे तैर रहा है।

प्रश्न : इसमें सूत्र है कि व्यापक और इकाई के परस्परता में भार नहीं है? ये क्या है?

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