• कृषि के साथ उपयोगी वृक्ष, चारा, साग सब्जियों, व सुगंधित वनस्पतियों की उन्नत प्रणाली को सुलभ (प्रशिक्षण व क्रियान्वयन) करने की व्यवस्था।
  • उन्नत बीज उपलब्ध कराने व तैयार कराने की व्यवस्था। गाँवव्यापी गोबर गैस व कम्पोस्ट खाद बनाने के लिए व्यवस्था।
  • कृषि, फल, साग, सब्जियों में होने वाले रोगों के निवारण में, स्थानीय अनुभवों को सर्वाधिक उपयोग करने की व्यवस्था। रोगों के निवारण न होने की स्थिति में अन्य बाह्य प्राप्त स्रोतों के सहयोग से निवारण की व्यवस्था।
  • कृषि को उत्पादन बढ़ाने के लिए समस्त आवश्यकीय उपायों को सुलभ करने की व्यवस्था। कृषि संबंधी समस्त समस्याओं को निराकरण उत्पादन सलाहकार समिति करेगी।

पशुपालन :-

कृषि के साथ पशुपालन अनिवार्य होगा। पशुपालन के साथ गोबर गैस प्लांट अनिवार्य होगा। गोबर गैस प्लांट स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार कुछ परिवार मिलकर, सामूहिक रुप से या प्रत्येक परिवार के लिए लगाया जायेगा। पशुपालन का मुख्य उद्देश्य खेत जोतने के अलावा गाँव में आवश्यकता से अधिक दूध, घी आदि का उत्पादन, गोबर गैस द्वारा गाँव में ईंधन व प्रकाश तथा खाद की पूर्ति करना होगा। पशुपालन इस अनुपात में करना होगा। जिससे गाँव की आवश्यकतानुसार खाद की पूर्ति, गोबर व कम्पोस्ट खाद पर्याप्त हो सके। साथ ही मिट्टी का लवणी करण, अम्लीय करण कठोरपन, व उर्वरक क्षमता में हो रहे ह्रास को पूरी तरह रोका जा सके।

प्रत्येक कृषक अपने खेत में इस प्रकार का फसल-चक्र अपनाएगा जिससे उसके पास जितने पशु हैं उसके लिए पर्याप्त मात्रा में चारा, घास, भूसी मिल सके। इस व्यवस्था में उन्हें पारंगत बनाने की व्यवस्था होगी।

पशुओं के रोग निवारण के लिए स्थानीय अनुभवों को सर्वाधिक उपयोग करने की व्यवस्था होगी। इन उपायों से रोग निवारण न होने की स्थिति में बाह्य विशेष चिकित्सा की व्यवस्था होगी।

उपरोक्त अर्हता को प्राप्त करने की व्यवस्था उत्पादन सलाहकार समिति करेगी। देश विदेश में शहद की बढ़ती हुई मांग को ध्यान में रखते हुए मधुमक्खी पालन पर विशेष ध्यान दिया जायेगा।

स्थानीय मानसिकता व आवश्यकताओं के आधार पर भेड़, रेशम के कीड़े, बकरी व अन्य पशुओं के पालन की व्यवस्था की जाएगी।

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