1. कृषि

2. पशु-पालन

3. वन व वनोपज

4. खनिज

5. हस्त शिल्प

6. ग्राम शिल्प

7. कुटीर उद्योग

8. ग्रामोद्योग

9. सेवा

कृषि :-

वर्तमान स्थिति में ग्राम की कृषि उपज, फसलों की किस्में प्रकार, तादाद, कृषि में व्यस्त धन-बल, कृषि भूमि, पड़ती भूमि, कृषि संभावित भूमि, सिंचाई, उर्वरक, व्यवस्था, पशुपालन व्यवस्था आदि के आधार पर “उत्पादन-कार्य सलाहकार समिति” ग्राम सभा व विनिमय समिति के साथ मिलकर, एक ग्रामव्यापी कृषि योजना तैयार करेगी। जिसमें पशुपालन व ग्राम सीमावर्ती वन प्रबंध का समावेश होगा। योजना में पूरे ग्राम की स्थानीय आवश्यकताओं के आधार पर धान, गेहूँ, दलहन, तिलहन, मसाला, सुगन्धित वनस्पतियों, औषधियों, रेशा, कन्द जाति की उपजों, साग सब्जियों, फलों आदि की आवश्यकता से अधिक उत्पादन करने का कार्यक्रम होगा।

योजना में निम्न कार्यों की व्याख्या करने का कार्यक्रम होगा।

  • स्थानीय रूप से जो कृषि में पारंगत है उनमें ग्राम के अन्य लोगों (जो कृषि कार्य कर रहे हैं या जिनको भविष्य में कृषि कार्य लगना है) को कृषि में पारंगत बनाने की व्यवस्था।
  • स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार सिंचाई साधनों को एकत्रित करने की व्यवस्था। कृषि संभावित भूमि को, कृषि योग्य बनाकर उनका आबंटन (ऐसे व्यक्तियों को जिनके पास कृषि भूमि नहीं है) की व्यवस्था।

बंजर भूमि में उपयोगी फलदार वृक्ष, जड़ी बूटियों को लगाने की व्यवस्था।

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