विविधता दिखी। आकाश में असंख्य तारागण अनेक ग्रह-गोल और सौर-व्यूह जितने भी दिखते हैं इन सबमें छोटा बड़ा, कम प्रकाश, अधिक प्रकाश रूपी विविधताएँ देखने को मिली। ऐसे ही कारणों से प्रत्यक्ष को असत्य मान लिया।

इस अनुमान को मानव ने बहुत सारे कल्पना कहा और जीव नाम को कोई चीज होने का परिकल्पना दी। जीवों के रूप में जितनी भी प्रवृत्तियों का अध्ययन किया उसमें भी विविधताएं दिखाई पड़ी। प्रवृत्तियों को विशेषकर चार विषय और तीन ईषणाओं के आधार पर आंकलन किया। इसमें प्रवृत्तियों की विविधता जीव सत्य कहने में ही शंकायें अथवा विरोध कर दिया। जबकि जानना, मानना, पहचानना व निर्वाह करना बहुत दूर रह गया। तीसरा इन अनन्त रूप में दिखने वाली विविध रूपी संसार का मूल रूप में जो वस्तु है वही आगम रूप है, उसी में सब विलय हो जाता है। विलय होना ही निगमन है। वही सत्य है इस प्रकार आगम निगम का मूल रूप ही आगम प्रमाण है। इस प्रकार से मानते हुये इन वचनों के प्रति पूर्ण निष्ठा दृढ़ता सहित बहुत सारे मेधावियों ने अपने को अर्पित किया। बहुत कुछ साधना अभ्यास करने के उपरान्त भी परंपरा के रूप में सिद्ध नहीं हुआ। आगम प्रमाण सर्वाधिक रहस्यमय हो गया और अनुमान व प्रत्यक्ष वादग्रस्त हो गया। इस प्रकार मानव प्रमाण सहित जीना चाहते हुए भी सार्थक न होने की स्थिति व घटना बनते ही आया।

इसके अनन्तर वैज्ञानिक विधि प्रयोग यंत्र प्रमाणों को स्वीकारा गया। क्योंकि पूर्वावर्ती प्रमाणों से तृप्ति नहीं मिल रहा था। प्रयत्न जारी था इसी को अपना लिया। प्रमाण स्थली में प्रयोगशाला अथवा यंत्र स्थापित होता गया फलस्वरूप सर्वाधिक संख्या में मानव प्रयोग विधि व उसके परिणामों को स्वीकारता आया।

प्रयोग विधियों से अभी तक सर्वमानव में वर्तमान में प्रमाणित क्रियाओं में से ज्ञानेन्द्रिय व कर्मेन्द्रिय गति बढ़ाने की उपलब्धि हुई है। चिन्हित रूप में हाथ-पैर, आँख-कान की क्रिया गतियाँ जो मानव में होती हैं उसे बढ़ाने के लिये यंत्रों की परिकल्पना व प्रमाण सिद्ध हुआ है। साथ ही गति बढ़ी भी है, जैसे किसी भी यान-वाहन से पैर की गति से अधिक गतिपूर्वक गम्य स्थलियों में पहुँचता हुआ देखने को मिलता है। हाथ से करने वाली क्रियाओं में से यथा हल जोतने व लिखने वाली क्रियाओं में गति स्थापित हुई है। यंत्रों से कृषि कार्यों को सम्पन्न होता हुआ देखने को मिलता है जैसे:- ट्रेक्टर एवं अन्य कृषि यंत्र। हाथ से होने वाली लिखाई के लिये टाइप मशीन से आरम्भ होकर कम्प्यूटर मशीन तक पहुँच चुका है। इसके अतिरिक्त भी कपड़ा व बर्तन बनाने में

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