स्वास्थ्य-संयम व्यवस्था
ग्राम के सभी व्यक्तियों के स्वास्थ्य एवं संयम की जिम्मेदारी, ग्राम स्वास्थ्य-संयम समिति की होगी। यह समिति शिक्षा-संस्कार समिति के साथ मिलकर कार्य करेगी। स्वास्थ्य-संयम संबंधी पाठ्यक्रम और कार्यक्रम को तैयार कर शिक्षा में सम्मिलित कराएगी। ग्राम चिकित्सा केन्द्र की व्यवस्था, योगासन, व्यायाम, अखाड़ा खेल कूद व्यवस्था, स्कूल के अलावा खेल मैदान (स्टेडियम), सांस्कृतिक भवन, क्लब आदि व्यवस्था का दायित्व, ग्राम स्वास्थ्य समिति का होगा समिति स्थानीय रुप से उपलब्ध जड़ी-बूटियों द्वारा औषधि बनाने के लिए आवश्यकीय व्यवस्था करेगी। इसके साथ ही पशु चिकित्सा केन्द्र की व्यवस्था का दायित्व भी स्वास्थ्य समिति का होगा। समिति “समन्वित चिकित्सा” (आयुर्वेद, एलोपैथी, होमियोपैथी, यूनानी, योग प्राकृतिक, मानसिक) के उन्नयन की व्यवस्था करेगी।
सब ग्राम वासियों को स्वास्थ्य व्यवहार, आचरण संबंधी मूल्यों का मूल्यांकन, उपयोगिता व प्रयोजन मूलक पद्धति से, समिति व्यवस्था प्रदान करेगी। अलंकार, प्रसाधन कार्य, शरीर स्वच्छता, महिलाओं व बच्चों को रोग-निरोधी टीके, और सीमित व संतुलित परिवार के रुप में व्यवहृत होने के लिए व्यवस्था प्रदान करेगी। ऐसी जागृति के लिए एक व्यापक कार्यक्रम को समिति चलाएगी। सामान्य रुप में घटित अस्वस्थता को दूर करने के लिए, घरेलू चिकित्सा में प्रत्येक परिवार को अथवा प्रत्येक परिवार में एक व्यक्ति को प्रवीण बनाने के लिए विभिन्न कार्यक्रम चलाए जाएँगे। घरेलू चिकित्सा से रोग शमन न होने की स्थिति में स्थानीय केन्द्र द्वारा चिकित्सा होगी। वहाँ राहत न मिलने की स्थिति में, निकटवर्ती चिकित्सा केन्द्र में पहुँचाने और चिकित्सा सुलभ कराने की व्यवस्था स्वास्थ्य संयम समिति करेगी।
न्याय-सुरक्षा व्यवस्था
न्याय-सुरक्षा समिति :- ग्राम सभा के द्वारा मनोनीत की जायेगी। यह समिति गाँव की सम्पूर्ण व्यवहार संबंधी विवादों को हल करने के लिए स्वतंत्र होगी व बाह्य हस्तक्षेपों से मुक्त रहेगी। न्याय प्रक्रिया का स्वरुप स्वयं स्फूर्त सुधार प्रणाली पर आधारित रहेगा ग्राम न्यायलय में सम्पूर्ण प्रक्रिया मानवीय संचेतनावादी व्यवहार पद्धति पर आधारित होगी। चूंकि प्रत्येक मानव को, मानवीयता पूर्ण पद्धति, प्रणाली व नीति पूर्वक जीने का अधिकार समान है। इसके अनुसार गाँव में मानवीयता पूर्ण आचरण पद्धति, मानवीयता पूर्ण व्यवहार प्रणाली व अर्थ (तन, मन, धन) की सुरक्षात्मक व सदुपयोगात्मक नीति रहेगी। जो भी व्यक्ति इस व्यवस्था की निरंतरता बनाए रखने में हस्तक्षेप करेगा, वह सुधरने के लिए बाध्य होगा। मानव अज्ञान, अत्याशा और अभाववश ही गलती, अपराध तथा तन, मन, धन रुपी अर्थ का अपव्यय करता है। यह व्यवहार मानवीयता