सुन्दर, समाधानपूर्ण होना पाया जाता है। यही नित्य उत्सव का आधार और परिणाम है क्योंकि किसी संबंध को सुखपूर्वक निर्वाह करना आरंभ होता है उसी के साथ सुन्दरता और समाधान प्रभावित किया रहता है। समाधान सहित किसी संबंध को निर्वाह करना आरंभ करते हैं उसी समय से समाधान और सुख प्रभावित किया रहता है। इसी प्रकार सुन्दरतापूर्वक किसी संबंध को निर्वाह करना आरंभ करते हैं उसी के साथ समाधान और सुख प्रभावित किया रहता है। इसका प्रधान प्रक्रिया स्वरूप को हम देख पाते हैं कि अस्तित्व संबंध को समाधान पूर्वक निर्वाह करते हुए सुख, सुन्दरता को अनुभव किया जाता है। नैसर्गिकता के साथ सुन्दरतापूर्वक संबंध का निर्वाह करते हुए स्थिति-गति में सुख और समाधान का अनुभव करना सहज है। मानव संबंधों में सुखपूर्वक संबंध निर्वाह करता हुआ गति-स्थिति में सुन्दरता और समाधान का अनुभूत होना देखा गया है। यही पूर्णता का स्वरूप है उसकी अक्षुण्णता स्पष्ट है।

सम्पूर्ण उत्सव में लक्ष्य सुख, सुन्दर, समाधान का अनुभव; विचारों में उज्जवलता, कार्य-व्यवहार में उदात्तीकरण ही उत्साह और प्रसन्नता का उत्कर्ष होना देखा गया है। यह जागृतिपूर्वक ही सम्पन्न होना पाया गया है।

विवाह संस्कारोत्सव मुहूर्त में स्वाभाविक रूप में कन्या वर पक्ष के बन्धु-बांधव, मित्रों का उपस्थित रहना वांछनीय कार्य है। वधु-वर स्वाभाविक रूप में स्वायत्त मानव के रूप में पारंगत परिवार मानव के रूप में प्रमाणित रहने के आधार पर ही उभय अर्हता का निश्चय होना पाया जाता है। जैसे ही किसी शोभनीय स्थली में उभय पक्ष के सभी लोग एकत्रित होते हैं उसमें सभी आयु-वर्ग के लोगों का रहना स्वाभाविक है। सभा स्थल के एक ओर कन्या पक्ष के माता-पिताओं से संबंधित बन्धु-बान्धवों का होना, उन्हें क्रम से मातृ पक्ष के लोगों को माता के तरफ कतार से, पिता पक्ष के सभी लोगों को पिता के साथ कतार से बैठाया जाना शोभनीय होता है। इसी प्रकार वर पक्ष का भी कतारीकरण विधि से आसनासीन कराना होता है। इस कार्य में वधु-वर सहित उनके सभी मित्रगण भी प्रवृत्त रहते हैं। तीसरे ओर वधु का मित्रों की ओर तथा चौथे ओर वर के मित्रों का कतारीकरण विधि से आसनासीन कराया जाता है। तदोपरान्त आसनासीन वधु के माता-पिता के मध्य में रिक्त आसन पर वधु का आसीन होना उसी प्रकार वर के माता-पिता के मध्य में वर का आसीन होना सभा स्थल का शोभा सम्पन्न होती है। उसके तुरंत बाद वधु के पिता अपने आशय को व्यक्त करते हैं कि “मैं अमुक नाम वाला अपने पत्नी का नाम सहित, हम आपकी सम्पूर्ण जागृति और प्रामाणिकता सहित मेरे पुत्री अमुक नाम वाली जो यहाँ आपके

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