• संबंध, मूल्य, मूल्यांकन, उभयतृप्ति को प्रमाणित करने का संकल्प करेंगे।
  • मानवीयतापूर्ण आचरण में पूर्ण निष्ठा बरतने का संकल्प करेंगे।

इस प्रकार किये जाने वाले हर संकल्प के साथ हर्ष ध्वनि पूरी सभा में होना स्वाभाविक है और उत्सव का मार्गदर्शक हर संकल्प के उपरान्त उसकी महिमा आवश्यकता और प्रयोजनों का प्रबोधन करेंगे। इसी क्रम में आवश्यकतानुसार संकल्पों के बीच-बीच आनुषंगीय गीत का भी प्रकाशन तथा प्रदर्शन किया जाना स्वाभाविक रहेगा। इस प्रकार संकल्प समारोह सम्पन्न होने के उपरान्त सर्वप्रथम उभय पक्ष के माता-पिता, वधु-वर को परिवार मानव के रूप में सफल होने की कामना करेंगे। पुष्पवर्षा के साथ-साथ वधु-वर से अधिक आयु एवं समान आयु वाले इसी प्रकार आशीष करेंगे। वधु-वर से छोटे आयु वाले सभी लोग आपके परिवार जीवन से हम सब प्रेरणा पाते रहेंगे ऐसी शुभकामना व्यक्त करेंगे और पुष्प वर्षा करेंगे।

अंत में हर्ष ध्वनि के साथ समारोह सम्पन्न होगा। इसी के साथ-साथ वधु-वर के माता-पिता सबको कृतज्ञता अभिनंदन प्रस्तुत करेंगे। इसके तुरंत बाद वधु-वर दोनों को पारितोष अर्पित करना चाहेंगे, करेंगे। इस प्रकार विवाहोत्सव कार्य को सम्पन्न करना एक अनिवार्य स्थिति है।

दिन, समय, बेला, मुहूर्त के संबंध में भी मानव परंपरा में विचार विधि कल्पना में आना स्वाभाविक है। इस मुद्दे पर प्रधान रूप में जागृति के उपरान्त, जागृत परंपरा में मानवीयतापूर्ण संचेतना अर्थात् जानने, मानने, पहचानने, निर्वाह करने सहज कार्य-व्यवहार, विचार सम्पन्न करने की शुभ व सुन्दर समाधानपूर्ण स्थिति-गति रहेगी। मानव ही दृष्टा पद प्रतिष्ठा में होने के कारण विवाह के लिये अनुकूल समय को ऋतुकाल के अनुसार निर्णय लेना और ब्रह्माण्डीय किरण विधि से ग्रह-गोल-नक्षत्रों का स्थिति-गतियों को आवश्यकतानुसार पहचानना स्वाभाविक रहेगा। इसी के साथ दिन, वार, तिथियों को पहचानना रहेगा ही। ये सभी बिन्दुओं पर मानव सर्वतोमुखी प्रवृत्तियों का द्योतक है। इस क्रम में स्वाभाविक है बसन्त और शीत ऋतुओं में मानव को सभी देश-काल में विवाहोत्सव का अनुकूलता बना ही रहता है। मानवीयतापूर्ण परंपरा के साथ सभी ब्रह्माण्डीय किरण अनुकूल रहना स्वाभाविक रहता है। क्योंकि मानवीयतापूर्ण परंपरा का अवतरण में भी ब्रह्माण्डीय किरणों का सानुकूलता बना ही रहता है। इसी सत्यतावश ब्रह्माण्डीय किरणों का सानुकूलता में विश्वास होना स्वाभाविक है। इसके उपरान्त भी हर देश जो अक्षांश-देशान्तर रेखा विधि से धरती पर देश का चिन्हित होना उस देश पर ब्रह्माण्डीय किरणों के प्रभावों को पहचानना मानव जागृति सहज कृत्य और परीक्षण है। इस विधि से भी शुभ बेला को पहचान सकते हैं।

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