कालान्तर में उपर्युक्त व्यवस्था के अनुसार प्रत्येक ग्राम सभा के निर्वाचित सदस्य अपने दस सदस्यों में से एक सदस्य को “ग्राम समूह सभा” में, ग्राम समूह सभा के दस सदस्य एक को, ग्राम क्षेत्र सभा, ग्राम क्षेत्र सभा के दस सदस्यों में से एक सदस्य को मंडल सभा, मंडल सभा के 10 सदस्यों में से एक सदस्य को “मंडल समूह सभा”, मंडल समूह सभा के दस सदस्यों में से एक सदस्य को “मुख्य राज्य सभा”, मुख्य राज्य सभा के दस सदस्यों में से एक सदस्य को “प्रधान राज्य सभा” व प्रधान राज्य सभा के दस सदस्यों में से एक सदस्य को “विश्व राज्य सभा” के लिये निर्वाचित करेंगे। इस प्रकार प्रत्येक स्तर में प्रत्येक व्यक्ति सिर्फ 10 व्यक्तियों का मूल्यांकन कर अगली सभा के लिए सदस्य निर्वाचित करेंगे।

निर्वाचित सदस्यों की अर्हता :-

परिवार से लेकर ग्राम-सभा तक प्रत्येक निर्वाचित सदस्य की अर्हता निम्न होगी :-

  • उसकी आयु कम से कम 21 वर्ष होगी।
  • वह समाधान सहित समृद्धि पूर्वक जीता होगा और व्यवसाय में स्वावलम्बी व व्यवहार में सामाजिक होगा।
  • मानवीय आचरण के रूप में वर्तमान में प्रकाशित होगा।

कार्य क्षेत्र :-

  • ग्राम सभा का कार्य 100 परिवारों के साथ होगा। उसका भू-क्षेत्र, ग्राम सीमा तक होगा। ग्राम सीमावर्ती क्षेत्र की समस्त भूमि, वन सम्पदा, खनिज, जल स्त्रोत व अन्य सम्पदाएं ग्राम सभा के अधिकार क्षेत्र में होंगी।
  • ग्राम सभा, सामान्यतः ग्राम के सभी परिवारों का प्रतिनिधित्व करेंगी।

कार्यकाल :-

ग्राम सभा 4 वर्ष के लिए निर्वाचित होंगी। हर चार वर्ष बाद परिवार व “परिवार समूह सभा” को अपने-अपने प्रतिनिधि को फिर से निर्वाचित करने का अधिकार होगा। हर ‘परिवार समूह सभा’ के दस सदस्यों को ग्राम सभा में फिर से नए सदस्यों को चुनने का अधिकार होगा।

कार्य शैली :-

प्रत्येक ग्राम सभा, “ग्राम स्वराज्य व्यवस्था” को स्थापित करने के लिए निम्न 5 समितियों का गठन करेगी:-

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