के आधार पर सम्पन्न होता ही रहता है। यही नित्य उत्सव का आधार है। श्रेष्ठता के अनन्तर श्रेष्ठता सहज योजनाएँ अग्रिम क्षणों-मुहूर्त, दिनों-महिनों और वर्षों में उत्सव का आधार बनता है।
भूमि: स्वर्गताम् यातु, मनुष्यो यातु देवताम्।
धर्मो सफलताम् यातु, नित्यम् यातु शुभोदयम् ॥
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