- न्याय विधि मानव सहज आचरण रूप में हम पहचान चुके हैं। सर्वमानव जीवन सहज रूप में न्याय की अपेक्षा करता ही है।
- स्वास्थ्य संयम - यह मानव कुल में बारम्बार विचार प्रयोग होते ही आया है। यह जीवन जागृति को व्यक्त करने योग्य रूप में कर्मेन्द्रिय और ज्ञानेन्द्रिय सम्पन्न मानव शरीर तैयार रहने से ही है। पुनश्च, जीवन सहज जागृति को मानव परंपरा में प्रमाणित करना ही स्वस्थ शरीर का मूल्यांकन है। तीसरे प्रकार से, जीवन जागृति स्वस्थ शरीर द्वारा प्रमाणित होता है। जीवन जागृति का साक्ष्य जीवन ज्ञान, अस्तित्व दर्शन ज्ञान, मानवीयतापूर्ण आचरण ज्ञान पूर्वक परिवार सभा से विश्व परिवार सभाओं में भागीदारी को निर्वाह करना, सुख; शांति; संतोष; आनन्द का अनुभव करना, समाधान, समृद्धि, अभय, सहअस्तित्व को प्रमाणित करना। इसे हम भली प्रकार से स्वीकार कर चुके हैं।
- शिक्षा-संस्कार में मानवीकृत शिक्षा को हम भले प्रकार से पहचानें है इसमें मानव का सम्पूर्ण आयाम, दिशा, परिप्रेक्ष्य और कोणों का अध्ययन है। देश और काल, क्रिया, फल, परिणाम सहज समाधानपूर्ण विधि को समझा गया है। यह सर्वमानव में जीवन सहज रूप में स्वीकृत है ही।
ऊपर कहे अनुसार संपूर्ण मानव में सुखी होने का अपेक्षाएं समान रूप से देखने को मिलता है। उसका भाषा केवल सर्वशुभ ही है और उसका स्वरूप समाधान, समृद्धि, अभय और सहअस्तित्व है। ऐसा सर्वशुभ स्वरूप ही मानव मात्र की अपेक्षा होना, उसका स्वरूप सहअस्तित्व विधि से अखण्ड समाज सार्वभौम व्यवस्था के रूप में परिलक्षित प्रमाणित होना पाया जाता है। परिलक्षित होने का तात्पर्य परिपूर्णतया लक्ष्य सम्पन्न होने से है अथवा परिपूर्णतया लक्ष्य को जानने, मानने, पहचानने, निर्वाह करने से है। दूसरे क्रम में परिपूर्णतया परीक्षणपूर्वक स्वीकार किये गये लक्ष्य अथवा सार्वभौम लक्ष्य है। सार्वभौमता का मतलब सम्पूर्ण मानव से आवश्यकीय, वांछित, अनिवार्यतः एवं प्रमाण सहज लक्ष्य है। मानव परंपरा में ऊपर कहे नौ विधाओं से सार्वभौम शुभ लक्ष्य के रूप में स्वीकृत होना सहज है। इसके साथ यह भी सम्भावना समीचीन रूप में देखने को मिला है कि ऊपर कहे नौ बिन्दुओं में स्पष्ट किया गया कि अवधारणाओं का धारक-वाहक केवल मानव ही है। ऐसा मानव सहज धारक वाहकता सर्वशुभ के अर्थ में सम्पूर्ण ताना-बाना का आधार प्रत्येक मानव ही जीवन सहज रूप में दृष्टा होना देखा गया है। दृष्टा पद का वैभव को जानने, मानने, पहचानने, निर्वाह करने के रूप में देखा गया है। यह केवल मानव में ही प्रमाणित