स्वयं समाधान और उसकी निरंतरता है, यही मानव धर्म है। मानव धर्म ही मानव का त्व सहित व्यवस्था अथवा मानवत्व सहित व्यवस्था होना देखा गया है। जीवन सहज रूप में सर्वमानव में सहज रूप में इसकी अपेक्षा बनी हुई है।

1. “जागृति मानव का वर है।” मानव सहज कर्मस्वतंत्रता का तृप्ति बिन्दु स्वानुशासन है। यह परम जागृति के रूप में प्रमाणित होता है। यह मानव परंपरा में मौलिक विधान है।

2. “सार्वभौम व्यवस्था व अखण्ड समाज, मानव सहज वैभव है।” मानव सहज कल्पनाशीलता का तृप्ति बिन्दु, परिवार मूलक स्वराज्य व्यवस्था में भागीदारी के रूप में प्रमाणित होता है। यह मौलिक विधान है।

3. “मानवीय लक्ष्य परम जागृति के रूप में सार्वभौम है।” मानवीयतापूर्ण अभिव्यक्ति, प्रकाशन सहज संप्रेषणाएँ, संपूर्ण आयाम, कोण, दिशा, परिप्रेक्ष्यों में समाधान, समृद्धि, अभय व सहअस्तित्व रूपी वैभव को प्रमाणित करता है। यही मौलिक विधान है।

4. “मानव बहुआयामी अभिव्यक्ति है।” मानव सहज परंपरा में अनुसंधान, अस्तित्व मूलक मानवीयतापूर्ण अध्ययन, शिक्षा व संस्कार, आचरण व व्यवहार, व्यवस्था, संस्कृति-सभ्यता और संविधान ही सहज प्रमाण है। यही मौलिक विधान है।

उक्त चारों मौलिक अधिकार सूत्र में इंगित किया गया आशय तथ्य और प्रयोजन एक पाँचवे सूत्र के व्याप्ति में ही स्पष्ट हो चुका है। मौलिक अधिकार का प्रयोग जागृत मानव ही उपयोग, सदुपयोग, प्रयोजनशील बना पाता है; अतएव मानव अपने अखण्डता, सार्वभौमता और अक्षुण्णता को बनाये रखने का दायित्व और कर्तव्य मानव में ही मानव में, से, के लिये सन्निहित है। इन सबका अथवा सभी प्रकार की सफलता जीवन जागृति ही है और जागृति पूर्णता ही है। जागृति और जागृति पूर्णता के अनन्तर ही मानव अपने अखण्डता, सार्वभौमता, अक्षुण्णता को सहज ही पहचानता है। फलतः निर्वाह करना स्वाभाविक हो जाता है। मानव में ही जानने, मानने, पहचानने, निर्वाह करने का वैभव प्रमाणित होता है। यह जागृति व जागृति पूर्णता का ही द्योतक है। संपूर्ण आयाम, कोण, दिशा, परिप्रेक्ष्यों में जानने, मानने का प्रमाणों में दायित्व पहचानने, मानने, निर्वाह करने का वैभव प्रमाणित होता है। यह जागृति पूर्णता का ही द्योतक है। संपूर्ण आयाम, कोण, दिशा, परिप्रेक्ष्यों में जानने, मानने का प्रमाणों में दायित्व पहचानने और निर्वाह करने के रूप में कर्त्तव्य करते हुए स्वयं स्फूर्त होता है। कर्तव्य से समृद्धि, दायित्व से समाधान निष्पन्न एवं प्रमाणित

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