• मानवीय शिक्षा संस्कार समिति 
  • न्याय सुरक्षा समिति 
  • उत्पादन कार्य समिति 
  • विनिमय कोष कार्य समिति 
  • स्वास्थ्य संयम समिति 

इन्हीं पांच समिति के साथ हर सभा के सम्मुख प्रस्तुत अन्यान्य कार्यों को समावेश किया जाता है। ऐसे कार्य को ग्राम परिवार सभा से सभी आठ परिवार सभाएं अपनी स्थिति गति के अनुसार निश्चय करेगी। 

8 - अस्तित्व दर्शन: सहअस्तित्व रूपी अस्तित्व दर्शन

सहअस्तित्व रूपी अस्तित्व सहज स्वरूप - सत्ता में संयुक्त जड़-चैतन्य प्रकृति :- 

प्रकृति अपने स्वरूप में 4 अवस्थाओं में है- पदार्थावस्था प्राणावस्था जीवावस्था व ज्ञानावस्था। 

चैतन्य प्रकृति– जीवावस्था, ज्ञानावस्था  

जड़ प्रकृति– पदार्थावस्था, प्राणावस्था

ज्ञानावास्था में मानव गण्य है। ज्ञानावस्था में गण्य होने का आधार जीवन व शरीर का सहअस्तित्व। शरीर रचना में विशेषता यही है कि जीवन सहज कल्पनाशीलता कर्मस्वतन्त्रता को प्रमाणित कर पाना। जीवन में समझने की व्यवस्था बनी हुई है। 


मन में संबंधों को पहचानने और निर्वाह करने की व्यवस्था है ये जागृतिपूर्वक सम्पन्न होती है। 

वृत्ति में न्याय धर्म सत्य को पहचानने निर्वाह करने की व्यवस्था है। यह अनुभव मूलक विधि से सम्पन्न होता है। 

  • चित्त में अनुभव सहज चिन्तन और प्रमाणित करने योग्य चित्रण करने की व्यवस्था है। यह अनुभव मूलक विधि से सार्थक होता है। 
  • बुद्धि में अनुभव सहज बोध प्रमाणित करने का संकल्प प्रमाणित होने की व्यवस्था है। 
  • आत्मा में सहअस्तित्व सहज अनुभव उसका प्रमाण स्पष्ट होता है। 
  • यही जागृत जीवन की अभिव्यक्ति संप्रेषणा का अर्थ है। 
Page 100 of 106