युद्ध के मानसिकता को बनाये रखने के लिए शोषण एक आवश्यकता है। शोषण से संग्रह प्रवृत्ति और सुविधा व अधिकार सुरक्षा की प्रवृत्ति को सुरक्षित करने की हर समुदाय ने अपने अपने ढंग से प्रयत्न किया है। इसका प्रमाण यही है कि धरती के सभी देश युद्ध को वैध मान चुके हैं व हर संविधान व्यापार के रूप में शोषण को वैध मान चुका है। इसीलिए हर मानव इस बात को सोचने की आवश्यकता है कि युद्ध-शोषण आवश्यक है कि नहीं। अभी तक हर समुदाय शोषण-युद्ध करने की प्रक्रिया प्रयास को संघर्ष नाम दिया है। यह प्रवृत्ति कहां तक सर्वशुभ के लिए सूत्र पायेगा यह सोचने का मुद्दा है। और इसके साथ सर्वशुभ सूत्र को पहचानने की भी जरूरत है। इसी क्रम में जीवन विद्या प्रस्तुत है। यह मध्यस्थ दर्शन का ही रूप है। 

जागृत मानव क्या-क्या करेगा क्या नहीं करेगा: सामान्य आंकलन व मूल्यांकन का आधार

प्रमुख रूप में जागृति का प्रमाण प्रस्तुत करेगा। जागृति सहज प्रमाण का स्वरूप ज्ञान विवेक विज्ञान सम्पन्नता रहेगी

  • मानव लक्ष्य को प्रमाणित करेगा। कम से कम समाधान समृद्धि को प्रमाणित करेगा। 
  • परिवार में व्यवस्था सूत्र व्याख्या के रूप में जियेगा। 
  • समझे हुए को समझाने में, किये हुए को करने में व सीखे हुए को सिखाने में प्रवृत्त रहेगा। 
  • क्या नहीं करेगा :-

झूठ नहीं बोलेगा। 

रहस्य को बनाये नहीं रखेगा।  

शोषण कार्य से मुक्त रहेगा। 

  • <strong>11 -अस्तित्व में प्रत्येक एक अपने त्व सहित व्यवस्था है और समग्र व्यवस्था में भागीदारी करता है।</strong>
  • भागीदारी का प्रयोजन पूरकता उपयोगिता को प्रमाणित करना।  
  • सर्वप्रथम परिवार में पूरकता उपयोगिता को प्रमाणित करना होता है। परिवार में पहचान बनाए रहता है। ये विशाल होते-होते विश्व तक पहचान होने की संभावना बनी है। मानव अपनी पहचान को बनाने का इच्छुक है ही। सकारात्मक अर्थात् मानव लक्ष्य पूरा होने के अर्थ में प्रामाणिकता सहित पहचान बनाना एक आवश्यकता है। ऐसे आवश्यकता की पूर्ति समझदारीपूर्वक गवाहित होने के बाद स्पष्ट हो चुकी है। 
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