मानव लक्ष्य - समाधान, समृद्धि, अभय, सहअस्तित्व परम्परा के रूप में प्रमाणित होना। ये हर परिवार में प्रमाणित होना, हर मानव में अनुभव होना ।
व्यवस्था का इतिहास अभी गणतन्त्र शासन राजशासन के रूप में देखा जाता है। गणतन्त्र अथवा जनतन्त्र विधि से प्रतिनिधि व्यवस्था का कर्णधार होना पाया जाता है। कर्णधार का मतलब प्रतिज्ञापूर्वक निर्वाह करने वाला।
विगत 100 वर्ष में जो कुछ भी गणतान्त्रिक शासन प्रचलित हुई, कठिनाइयां जन्मी, सुगमताएं प्रमाणित हुई, ये सबको जांचने के बाद पता चला कि गणतान्त्रिक शासन नहीं हो सकता व्यवस्था हो सकती है। शासन विधि से इसी को व्यवस्था माना जाता है कि गलती को गलती से, अपराध को अपराध से रोकना। इनमें भागीदारी करना, क्रियान्वयन करना व्यवस्था माना जा रहा है। जबकि व्यवस्था मानव परम्परा में व्यवहारपूर्वक मानव संस्कृति सभ्यता विधि व्यवस्था मानव लक्ष्य को प्रमाणित करने के अर्थ में सार्थक होना पाया जाता है।
अभी तक गणतन्त्र प्रणाली में सबसे बड़ी मूल दुर्गति यही रही - धन नियोजन के उपरान्त ही मत संग्रहण होना पाया गया। इस प्रकार नोट वोट का गठबंधन हुआ। यही राजनैतिक अनाचार दुराचार और अपराधों का आधार बन चुकी है। यह इसका निराकरण समाधान, जागृत मानव परम्परा, दस सोपानीय व्यवस्था गति में समाधानित होती है।
मौलिक रूप में जन प्रतिनिधि के निर्वाचन में पैसा खर्च नहीं होगा। पैसा लगना चाहिए या नहीं ऐसा पूछा जाये तो नहीं लगना चाहिए ऐसा ही सब कहते हैं। कुछ लोगों को यह भी शंका होती है कि यह कैसे होगा।
10 व्यक्तियों को हर व्यक्ति अच्छी तरह पहचान सकते हैं व 10 व्यक्ति एक को। इस आधार पर निर्वाचन का मूल स्वरूप दस व्यक्ति। दस व्यक्ति में 1 व्यक्ति को निर्वाचित किया जाता है। ऐसे 10 व्यक्ति को एक परिवार माना जाता है। ऐसे 10 परिवारों से 10 निर्वाचित व्यक्ति एक परिवार समूह को स्थापित कर लेते हैं। ऐसे 10 परिवार समूह सभा से एक-एक व्यक्ति निर्वाचित हो कर एक ग्राम सभा को स्थापित करते हैं। ग्राम सभा के साथ पाँच समितियाँ कार्य करती हैं। समिति में कार्यरत व्यक्ति को ग्राम सभा मनोनीत करेगी।
ऐसे 10 ग्राम परिवार सभा में से एक-एक व्यक्ति का निर्वाचनपूर्वक 10 व्यक्ति एक ग्राम सभा समूह स्थापित करते हैं व ऐसे 10 ग्राम समूह सभा से 1-1 व्यक्ति एक क्षेत्र सभा व ऐसे 10 क्षेत्र सभा से एक-एक व्यक्ति निर्वाचित हो कर एक मण्डल सभा को स्थापित करते हैं। ऐसे 10 मण्डल सभा 1-1 व्यक्ति को निर्वाचित कर 10 जन प्रतिनिधियों से एक मण्डल समूह सभा स्थापित होती है। ऐसे 10 मण्डल समूह सभा में से एक-एक व्यक्ति निर्वाचित हो कर 10 जन प्रतिनिधियों से एक मुख्य राज्य सभा स्थापित होगी। ऐसे 10 मुख्य राज्य परिवार सभा में से एक-एक व्यक्ति निर्वाचित होकर एक प्रधान राज्य सभा को स्थापित करते हैं। जितने भी प्रधान परिवार राज्य सभा होती है उनमें से एक व्यक्ति निर्वाचित हो कर एक विश्व सभा स्थापित कर लेते हैं। इस विधि से निर्वाचन कार्य में पैसे का निवेश होना समाप्त हो जाता है।
ग्राम परिवार सभा से विश्व परिवार सभा तक हर सभा के साथ पाँच समितियां कार्यरत रहेंगी। आवश्यकतानुसार व्यक्तियों की संख्या मनोनीत के आधार पर ही रहेगी। पाँच समितियों का कार्यरूप:-