मनुष्य को अपने पेट भरने के लिये रोजी कमानी पड़ती है। इस कारण वह व्यापार करता है या किसी के यहाँ नौकरी करता है। ऐसा करने से मनुष्य को जो दौलत प्राप्त होता है उसे वह इकट्ठा करता है। उसका संग्रह करता है। वह ऐसा इसलिये करता है ताकि वह इस कमाये गये दौलत का उपयोग कर सके। उपयोग भी उस तरह करें जिससे हम सुविधायें पा सकें। सुविधाओं के माध्यम से हमें सुख का कामना का होना स्पष्ट अनुभव होता है। मगर क्या मनुष्य इन सुविधाओं से सुख का अनुभव चिर-काल के लिये कर सकता है? निरंतर?
यदि एक व्यक्ति दस कमा लेता है तो उसे बीस कमाने की इच्छा होती है। जब वह बीस कमा लेता है तो सौ कमाने की इच्छा होती है।जब हजार कमा लेता है तो लाखों की और जब करोड़ कमा लेता है तो अरबों कमाने को उसका जी करता है। अतः मनुष्य की कामनाओं की कोई सीमा नहीं होती। संग्रह करके सुविधा उपलब्ध कर पाने की तृप्ती कभी उसे होती ही नहीं। अथवा मनुष्य कभी सुखी हो ही नहीं सकता।
मनुष्य एक तरह का जीव होता है, प्राणी होता है। लड़का.. लड़की... इनमें केवल शरीर ही नहीं और भी कुछ होता है। जैसे शरीर है शरीर के अनेक अंश हैं। ऐसा कहा जाता है कि दिमाग “memory” का “store house” है। सर्जरी से पता चलता है कि समस्त “brain” में ऐसी कोई जगह नहीं जहाँ ज्ञान या बुद्धि “store” किया जा सके।
तो प्रश्न यह उठता है कि दिमाग काम कैसे करता है? अर्थात् “Storage” कहाँ होता है? अगर यही जीवन है, प्राण है तो यह चीज क्या है? यह परमाणु है। परमाणु का मतलब होता है “atom” "A constitutionally Saturated atom" is जीवन या प्राण कोश। यह प्राण कोश सप्राणित भी हो सकता है अथवा निष्प्राणित भी। जो प्राण कोश साँस ले रहे होते हैं उन्हें सप्राणित कहते हैं। जो प्राण कोश सांस नहीं ले सकते हैं अथवा मृत हो जाते हैं उन्हें निष्प्राणित प्राण कोश कहा जाता है।
अर्थात् वह यह जीवन ही है जो सोचने का काम करता है और जिसके हमारे शरीर को छोड़कर चले जाने से कोई हमारे निर्जीव शरीर को आश्रय भी नहीं देता। इस कारण जीवन बहुत ही महत्त्वपूर्ण है और हमारे लिए इसे पहचानना भी अतिआवश्यक है ।
हम जिस समाज में रहते हैं उसमें अनेक प्रकार के लोग हमारे साथ निवास करते हैं। इनमें से कुछ लोग ज्ञान के क्षेत्र में हम से ज्यादा ज्ञानार्जन कर चुके होते हैं। ऐसे लोगों के प्रति जिनका ज्ञान हमारे से ज्यादा होता है उनके प्रति हमारे मन में सम्मान उत्पन्न होते हैं एवं हम उनका सम्मान करते हैं।
परन्तु ऐसे लोगों की पहचान कैसे की जा सकती है? यदि कोई आदमी अपनी डिग्रियों के बारे में बताये और प्रमाण दें तो क्या इस विचार से हम उन व्यक्तियों का सम्मान करना प्रारम्भ करते हैं? नहीं। किसी के ज्ञान का अंदाजा लगाना अथवा इस कारण पर उनका सम्मान कर पाने के लिए उनके साथ जीना अतिआवश्यक है। ताकि हम उनकी महानता को पहचान सकें। इस कारण हम व्यवस्था में रहते हैं। व्यवस्थायें कई प्रकार के होते है: परिवार व्यवस्था, ग्राम