सहअस्तित्ववादी विचार से अनुरंजित विधि से आप तक यह पत्रिका पहुंचता रहेगा। इसी विधि से हम इस बात पर आपको विश्वास दिलाएंगे कि स्वायत्त मानव के रूप में प्रमाणित होने के लिये पूर्ववर्ती निर्देशित, उपदेशित व्यक्तिवादी (एकांतवादी, विरक्तिवादी, भक्तिवादी, रहस्यवादी, जप, तप, यज्ञ, दान, ध्यान, आदि) उपाय आवश्यक नहीं हैं। जीवन ज्ञान और अस्तित्व दर्शन के विधिवत अध्ययन से मानवीयतापूर्ण आचरण प्रमाणित होता है। फलस्वरूप अखंड समाज सार्वभौम व्यवस्था का सूत्र प्रशस्त हो जाती है।                                                                           

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