4. मानव समाज व व्यवस्था तंत्र का आधार क्या होगा?

कामोन्मादी मनोविज्ञान या जीवन संचेतना अर्थात्  संज्ञानीयता एवं संवेदनशीलतावादी मनोविज्ञान 

भोगोन्मादी समाज चेतना या व्यवहारवादी अर्थात्  दायित्व व कर्तव्य की निर्वाहवादी चेतना 

लाभोन्मादी अर्थ व्यवस्था या आवर्तनशील सदुपयोग एवं सुरक्षावादी अर्थव्यवस्था

5.   मानव की समझ का अर्थ क्या होना चाहिए?

प्रामाणिकता या अप्रामाणिकता  

समाधान या समस्या 

“प्रयोग व्यवहार एवं अनुभव द्वारा सिद्ध होना ही प्रमाण और उसकी अभिव्यक्ति प्रामाणिकता और उसकी संप्रेषणीयता ही समाधान है” 

6. जीवन वैभव का पहचान कैसे होगा?

इंद्रिय सन्निकर्षात्मक व्यंजनाओं से या आशा विचार इच्छा संकल्प एवं अनुभव जैसे अक्षय शक्तियों से

 “संचेतना ही प्रत्येक मनुष्य में अपरिष्कृत, परिष्कृत एवं परिष्कृतपूर्ण पदों में वर्तमान है” 

7. मानवीय चरित्र का आधार क्या होना चाहिए?

वर्गवादी या सहअस्तित्ववादी 

व्यक्तिवादी या समाज (व्यवहार) वादी 

यांत्रिकतावादी या परिष्कृत संचेतनावादी 

“प्रत्येक मनुष्य में समाधान समृद्धि अभय व सहअस्तित्वपूर्वक वर्तने की संभावना समाहित है”

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