मध्यस्थ दर्शन पर आधारित सहअस्तित्ववादी दृष्टिकोण के आधार पर मानव किस प्रकार मनुष्येतर प्रकृति के साथ, मानव मानव के साथ, व मानव समग्र अस्तित्व में सत्ता सहअस्तित्व को अनुभव कर सकता है; यह निम्न तीन विचार धाराओं में अध्ययन कराया गया है।
- समाधानात्मक भौतिकवाद
- व्यवहारात्मक जनवाद
- अनुभवात्मक अध्यात्मवाद
सहअस्तित्व विचारधारा के आधार पर ही स्वराज्य (न्याय सुलभता, विनिमय सुलभता, उत्पादन सुलभता) व स्वतंत्रता (स्वानुशासन) मानव को जीने की कला के रूप में उपलब्ध हो जाये। इसलिये उसे निम्न शास्त्रों में अध्ययन सुलभ कराया गया है।
आवर्तनशील अर्थ चिंतन
- व्यवहारवादी जनचेतना (मानवीय संविधान व आचार संहिता)
- मानव संचेतनावादी मनोविज्ञान
- इसके साथ निम्न योजनायें उपलब्ध हैं:
परिवार मूलक ग्राम स्वराज्य व्यवस्था
मानवीय शिक्षा योजना
- मानवीय उत्पादन व्यवस्था योजना
- मानवीय न्याय व्यवस्था योजना
- मानवीय स्वास्थ्य संयम व्यवस्था योजना
- आवर्तनशील विनिमय व्यवस्था योजना
- पर्यावरण सुरक्षा योजना
- सार्वभौम राज्य व्यवस्था योजना
- मानवीय संविधान योजना