• अस्तित्व मूलक मानव केंद्रित चिंतन ज्ञान । 
  • विकास विधि (पूरकता + उदात्तीकरण = जागृति) जागृति मूलक व्यवहार प्रमाण सम्पन्न अध्ययन, प्रयोग जीने की कला। 
  • जीने की कला ही व्यवस्था है। वर्तमान में विश्वास और सुख सहज सुलभ होना समीचीन है, जो स्वतंत्रता और स्वराज्य का नित्य स्त्रोत है। स्वतंत्रता जो स्वानुशासन सर्वतोमुखी समाधान का प्रकाशन है। 
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