मार देंगे, हम अपने में प्रमाणित होंगे, ऐसा सोचें, वो क्या होगा सोच लो। अभी तक हम जो चले हैं इसी प्रकार की निष्ठुरता, धृष्टता, क्रूरता को लेकर चले हैं, फलस्वरूप कष्ट में घिर गए, घिरना ही था घिर चुके। तो अभी यदि सद्बुद्धि का प्रयोग करेंगे तो संभव है बची-खुची धरती की शक्तियां वो अपने में सँभालने में योग्य हो जायें। इस आधार पर हम ये प्रस्ताव ही रखे हैं।
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