उत्तर: ईश्वर के साथ व्यापक ही शब्द लगती है यह एक नाम दिया, इसको यदि संख्या देखकर देते है तो एक ही होता है। ईश्वर सर्वत्र ही एक है इसलिए एक लिखा। है तो व्यापक ही। ईश्वर व्यापक, प्रकृति अनंत।
जिज्ञासा: मानव जाति एक, कर्म अनेक।
उत्तर: मानव जाति अपने स्वरूप में एक बताई। मानव जाति को कैसे पहचाना- शरीर के आधार पर। शरीर में जो रंग, नस्ल के आधार पर जो आदमी को पहचाना गया, वो सभी आदमी में एक ही प्रकार का खून पाया गया। खून में जो विविधता जो देखी गयी जितना वो काले आदमी में भी उतना ही विविधता है जितना गोरे और भूरे आदमी में। इसके आधार पर लिखा है मानव जाति एक कर्म अनेक। अनेक कर्मो को करता हैं।
जिज्ञासा: भूमि एक राज्य अनेक।
उत्तर: धरती एक ही है, अखंड राष्ट्र है, राज्य अनेक हैं। तो अभी दस सोपान में हम पूरा राज्य को बताया- परिवार राज्य, परिवार समूह राज्य, ग्राम राज्य, ग्राम समूह राज्य, ऐसा दस नाम दिया है। दस सीढ़ी में पूरा धरती में अखंड समाज व्यवस्था की बात की है।
जिज्ञासा: मानव धर्म ,एक समाधान अनेक।
उत्तर: मानव धर्म, जो सुख है, सुख के लिए समाधान का सूत्र अनेक हैं। हर दिशा हर कोण से मनुष्य को समाधान मिलता है। मनुष्य को अनंत कोण संपन्न बताया है, हर वस्तु को बताया है। उसमे इसी प्रकार से अनंत विधि से मनुष्य को समाधान मिलता है। अनेक समाधान मिलता है सुखी होने के लिए। समाधान से सुख होता है।
जिज्ञासा: अनेक समाधान को थोड़ा सा बताइये
उत्तर: हर दिशा में हर कोण में हर परिप्रेक्ष्य में, हर मुद्दे में, एक परिवार में समाधान होता है और पड़ोस में समाधान, गाँव में समाधान, दस गाँव में समाधान, पूरा धरती के मानव के साथ समाधान ये कितना गिना जाए इसको और इनके साथ आहार से, विहार से, व्यवहार से, स्वयं मे विश्वास से, और सम्मान से, श्रेष्ठता के सम्मान से लेकर जितने भी हम कोणों में हम जाते है सभी मुद्दों में हमे समाधान मिलता है हम सुखी होते हैं।
जिज्ञासा: परन्तु चाहिए ये सब, ऐसा भी है न बाबा।
उत्तर: अभी भ्रम से जागृति की ओर गति है, अपना प्रस्ताव है अभी, जागृति हो गया ऐसा नहीं है। अभी जागृति का एक सूचना शुरुआत हुई है जागृत होना दिल्ली दूर है। सभी होना अभी और भी दूर है। ठीक है।