जिज्ञासा: विकास एवं जागृति ही सृष्टि है। 

उत्तर: विकास एवं जागृति ही सृष्टि और उसकी निरन्तरता है। 

जिज्ञासा: बाबा, नियम ही न्याय, न्याय ही धर्म, धर्म ही सत्य, सत्य ही ऐश्वर्य (सहअस्तित्व), ऐश्वर्यानुभूति ही आनन्द, आनन्द ही जीवन, जीवन में नियम है। 

उत्तर: बोलिए, इसको कितने अच्छे ढंग से समझ सकते हैं, जीवन ही ज्ञान। सर्वप्रथम क्या है? जीवन में ही ज्ञान होगा ना भाई, ज्ञान होने से क्या होगा लिखा? ज्ञान होने से अपने को ये पता लगता है, ‘नियम ही न्याय’। नियम पूर्वक जीने पर हम न्याय पूर्वक जीने की जगह में आ गए, न्याय पूर्वक जीने से समाधान आ गया। समाधान आने से, समाधान क्या चीज है, सुखी होना= समाधान। हम सुखी होना आ गया, तब हम सत्य को पहचानने गए। सत्य क्या चीज है? सहअस्तित्व रूपी सत्य को पहचान लिए, निर्वाह कर लिए। ठीक है ना। सत्य ही क्या है? सहअस्तित्व, इसके बीच में? (ऐश्वर्य) हाँ तो इसके बीच में सहअस्तित्व को ऐश्वर्य कहा। कहा है ना? सहअस्तित्व को वैभव कहा है। ऐश्वर्य का मतलब है, स्थिति, स्थिति के रूप में होना, निरंतर वैभव में रहना, वर्तमान में रहना, इसका नाम है वैभव। ऐसा वैभव सहअस्तित्व ही है। सहअस्तित्व कभी भी मरता ही नहीं है। सहअस्तित्व की मृत्यु होती ही नहीं। 

जिज्ञासा: ऐश्वर्यानुभूति ही आनन्द।

उत्तर: ऐसे सहअस्तित्व में अनुभूत, अनुभव होना, जो व्यापक वस्तु में सम्पूर्ण प्रकृति का होता है, फलस्वरूप ईश्वरानुभूति हम कह रहे हैं। ऐश्वर्य सहित ईश्वर। ऐश्वर्य क्या चीज है? सहअस्तित्व ऐश्वर्य है, व्यापक वस्तु में सम्पूर्ण प्रकृति नित्य वर्तमान, विकासशील, जागृतिशील, जागृति- यह वैभव है, यही अनुभव का मुद्दा है, ठीक है।  

जिज्ञासा: भ्रमित मनुष्य कर्म करते समय स्वतंत्र एवं फल भोगते समय परतंत्र है। 

उत्तर: भ्रमित व्यक्ति के बारे में कहा है, पशु मानव, राक्षस मानव के लिए कहा है, कर्म करते समय में स्वतंत्र है, फल भोगते समय में परतंत्र हो जाता है इसीलिए परेशान होता है। ठीक है? जबकि जागृत मानव जो कर्म करते समय में भी स्वतंत्र है, फल भोगते समय में भी स्वतंत्र।

 

जिज्ञासा: कर्म करते समय में स्वतंत्र एवं फल भोगते समय में परतंत्र है, भ्रमित मनुष्य, इसको थोड़ा सा और समझा दीजिए। 

उत्तर: जैसा किसी आदमी ने अपने पास बंदूक रखा है, उसमें स्वतंत्र है ना, वो ही बंदूक से उनको कोई गोली दाग दिया, तब क्या हुआ? उसका फल में स्वतंत्र नहीं रहा ना? बंदूक को एक कार्य रूप में हम लाए, तो जब उसी की

Page 20 of 94
16 17 18 19 20 21 22 23 24