यदि प्रमाणित होती है, यदि दूसरा कोई विधि से, मानव लक्ष्य प्रमाणित होना आवश्यक है, ये स्वाभाविक है। मानव लक्ष्य पूरा नहीं हुआ है, जीवन मूल्य पूरा हो गया ऐसा कहते हैं, इसमें तमाम प्रकार के रहस्य में चले गए वो। रहस्य मुक्ति के लिए आवश्यक है check and balance program। 

जिज्ञासा: अगला है बाबा, राष्ट्र में पूर्णता- कुशलता, निपुणता, पाण्डित्य। 

उत्तर: जैसा एक परिवार राज्य है, परिवार राज्यसभा, परिवार समूह राज्यसभा, एक ग्राम राज्यसभा अपन लिखे हैं, इसमें यदि पूर्णता को हम अनुभव करते हैं वो निपुणता कुशलता पांडित्य से है। पांडित्य क्या है? माने अखंड समाज सार्वभौमता को प्रमाणित करता है। निपुणता कुशलताएं समृद्धि के लिए कार्य करता है। श्रम से समृद्धि, समझदारी से समाधान। बोलिए साब, ये पूरा पड़ता है कि नहीं? 

जिज्ञासा: अंतरराष्ट्र में पूर्णता (अखंड राष्ट्र)। 

उत्तर: अखंड राष्ट्र-अखंड राष्ट्र का क्या मतलब है? धरती अखंड है ही, हमको बनाना नहीं है। “है” को पहचानना है। अभी धरती पर जो है ना 275 रेखा लगा करके उसमें fission fusion को बिछा लिया। बोलिए साहब। आदमी है कि हैवान है आप ही सोचो ना भाई। आप ही बताओ। बिछा लिया, अब ये सोच रहे हैं की बत्ती लगा दिया तो हम भी मरेंगे। 21 बार सूरज बनेगा धरती, ऐसा बता चुके हैं। यदि बत्ती लगाया, ये धरती सूरज हो गई, बत्ती नहीं लगाया तो रहा कैसा जाए? कहीं उग्रवादियों का हाथ में चले ना जाए, खाड़ी देश में चले ना जाए, उसके पास ना चला जाए, इसके पास में चले ना जाए, भारत सोचता है पाकिस्तान के पास चले ना जाए, पाकिस्तान सोचता है भारत के पास चले ना जाए। इस प्रकार की पिचकाहट में सब फंसे हैं। एक से एक अच्छा फंसे हैं। एक भी कम नहीं फंसे हैं। भक्कम फंसे हैं। ना आगे जा पाएं, ना पीछे हट पाएं, ऐसा फंसे हैं। ऐसी स्थिति में अपन एक प्रस्ताव दे रहे हैं, इसके अनुसार यदि सोचेंगे अखंड राष्ट्र की विधि से, तो जितने भी हम अज्ञानी, माने एक उग्रवादी, ये बहुत कटुवादी, झूठखोर, दंगा खोर, और सेंधखोर, सभी लूटखोर सबको अपन एक ही अवाहित कर सकते हैं-भाई समझदारी पूर्वक जीने से हम सब साथ में जी सकते हैं। अभी क्या सोचते हैं हमारा संविधान के अनुसार जिया करो। संविधान के रस्ता में आओ। सभी तो आवाहित करते हैं। संविधान स्वयं में क्या चीज है? परम झूठ लिखा है। क्या लिखा है, सब आदमी पाप कर सकता है, माने हर आदमी गलती कर सकता है ऐसा लिखा है, और अपराध कर सकता है लिखा है। गलती करने से क्या करना है? गलती करने वाले के साथ गलती करो, गलती को रोकने के लिए गलती करो, अपराध को रोकने के लिए अपराध करो, युद्ध को रोकने के लिए युद्ध करो। तीन धंधा है। हर संविधान में इतना ही है। एक संविधान नहीं, धरती में जितने भी कोदो दर रहे हैं सबका इतना ही हसरत है।

 

जिज्ञासा: मानवीय संस्कृति-सभ्यता- विधि-व्यवस्था में एकात्मता।

उत्तर: ठीक है ना, विधि व्यवस्था में एकात्मता, माने एकात्मकता का मतलब है- जो संस्कृति को सभ्यता पोषण करता है, ये क्या हुआ एकात्मता हुई। सभ्यता को विधि पोषण करता है, ये एकात्मता हुई। और विधि को व्यवस्था

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