जिज्ञासा: ये अपना पहचान बना के कार्य करने की बात जो आप कह रहे हैं, ये अपना पहचान से क्या आशय है।
उत्तर: आशय ये है, हमारा नाम बना रहे। ठीक है? ऐसा सोचना जो बना रहता है देव चेतना में। मानव चेतना में हमारा पुत्र का भी नाम हो, हमारा धन का भी प्रदर्शन हो, हमारा पहचान भी बना रहे, ये तीनों रहता है। देव चेतना में केवल एक ही बचता है। दिव्य चेतना में वो भी मुक्ति मिल जाती है। इतनी ही तो बात है। छोटा-छोटा परिवर्तन। केवल मानव चेतना में ही परिवर्तित होने में ही जो कुछ भी देर लगना है, देर लगना है, उसके बाद देव चेतना, दिव्य चेतना बहुत समीप है।
जिज्ञासा: आगे है बाबा, मांगल्य- जीवन मंगल, उदय मंगल, समाधान मंगल, जागृति मंगल, अनुभव मंगल इनसे क्या आशय है?
उत्तर: मांगल्य का मतलब है, अपन लिखे हैं “नित्यम यतु शुभोदयम”, मंगल कामना में लिखा है। याद आ रहा है? उसके पुष्टि में यह लिखा है, निरंतर शुभ कैसे उदय होता है। माने सर्वप्रथम क्या लिखा है? जीवन मंगल, जीवन जागृति के अनंतर, निरंतर मंगल। जागृति मंगल, उदय मंगल जागृति का उदय होना ये मंगल है। आगे, समाधान मंगल। मंगल हुआ इसका प्रमाण क्या है परंपरा में, निरंतर समाधान। समाधान क्या चीज है, सुखी होने का सूत्र। जागृति मंगल, हम जो जितने भी अनुभव किए हैं, उसको प्रमाणित करना मंगल। अनुभव मंगल, अनुभव मंगल निरंतर अनुभव के आधार पर ही ये चारों बातों को हम पूरा करते हैं। ठीक है। इस ढंग से नित्य मंगल उदय होने का बात बताया। [मंगल की निरंतरता की बात] शुभ की निरंतरता, शुभ निरंतर उदय होते रहे, दिनरात्रि, कोई क्षण छूटे ना।
जिज्ञासा: उपलब्धि- सहअस्तित्व में स्थापित मूल्यों की अनुभूति, दूसरा है समाधान समृद्धि व सर्वशुभ।
उत्तर: स्थापित मूल्यों का मतलब तो आपको विदित है। तो कृतज्ञता, गौरव, श्रद्धा, प्रेम, विश्वास, वात्सल्य को निरंतर प्रमाणित करते रहना, क्या चीज है यह? उपलब्धि है। परस्परता में उपलब्धि क्या चीज है, निरंतर स्थापित मूल्य प्रमाणित होते ही रहना ये उपलब्धि है।
जिज्ञासा: दूसरा है समाधान, समृद्धि व सर्वशुभ।
उत्तर: दूसरा विधि से यदि निरंतर हम इस उपलब्धि को मानते हैं, उपलब्धि को प्रमाणित करते हैं, समाधान, समृद्धि, अभय, सहअस्तित्व प्रमाण होता ही है। ये उपलब्धि है।
जिज्ञासा: भ्रम मुक्ति और नित्य जागरण।
उत्तर: बोलिए, तीसरा विधि से भ्रम मुक्ति, जागृति और प्रमाण यही होता है। तीन विधि से उपलब्धि को अपन पहचानते हैं। इस विधि से उपलब्धि को पहचाना, उस विधि से हो या इस विधि से हो। ये तीनों विधियों से हम