उत्तर: वो तो विरक्तिवाद बोला, भौतिकवाद कहा इसी की पूजा करो। अब क्या करें, कौन Decide करेगा। एक और बोले इसको दूध पिलाओ, मकर ध्वज खिलाओ, पूजा करो, पाठ करो ये बताया, और दूसरी जगह बोले इसको Cyanide दो, ज़हर दो, सर्प विष दो और इसको मार डालो। एक तरफ तो तंदुरुस्त बनाने के लिए कहा, एक तरफ मारने के लिए कहा, दोनों अतिवाद हुआ ऐसा मेरा स्वीकृति है। इसके बारे में आप-हम बात कर सकते हैं। मेरे अनुसार ये दोनों अतिवाद हो गया इसीलिए परंपरा नहीं बन पाई।
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