जिज्ञासा: आकर्षण परस्परता से।
उत्तर: आकर्षण क्या चीज़ है? ये परस्परता में आता है। कोई दो वस्तु के बिना आकर्षण को पहचाना नहीं जा सकता। परस्परता होना ही है।
जिज्ञासा: परस्परता गुरुता लघुता से।
उत्तर: एक बड़ा एक छोटा होने से या समान होने से परस्परता होती है। ये भी पता लग गये।
जिज्ञासा: लघुत्व और गुरुत्व, रचना एवं सापेक्ष ऊर्जाओं से।
उत्तर: लघुत्व और गुरुत्व, बड़ा छोटा जो है हम सापेक्ष ऊर्जाओं के रूप में पहचानते हैं। सापेक्ष ऊर्जा पूछा क्या चीज है- ध्वनि, चुम्बकीयता, विद्युत और ताप सापेक्ष ऊर्जा है। ताप भी सापेक्ष ऊर्जा है, ध्वनि भी सापेक्ष ऊर्जा है, विद्युत् भी सापेक्ष ऊर्जा है, चुम्बकीयता शाश्वत ऊर्जा है। ऐसा देखा गया है- चुम्बकीयता को भी शाश्वत नहीं मानते हैं। वो किस आधार पर- लोहा को पकड़ने के आधार पर। हम क्या कहते हैं अणु बनता है इसलिए इसमें चुम्बकीयता है ही। ऐसा हम कह रहे हैं। आप ही सोचो।
जिज्ञासा: रचना एवं सापेक्ष ऊर्जा क्रिया से, क्रिया पदार्थ से और पदार्थ का ह्रास एवं विकास सापेक्ष ऊर्जा के सदुपयोग एवं दुरुपयोग से सापेक्षित है।
उत्तर: रचना एवं सापेक्ष ऊर्जा क्रिया से, सापेक्ष ऊर्जा को हम कैसा पहचानते हैं- क्रिया से। सापेक्ष ऊर्जा को सदुपयोग और दुरुपयोग विधि से हम पहचाने हैं। जो जिसको दुरुपयोग करेगा वह उससे वंचित हो जायेगा, यह लिखा है। जैसे nuclear अपनी शक्ति को खो जाता है nuclear के रूप में रहता नहीं है। अपने स्वरुप को त्याग देता है न, यह आप ही कह रहे हो। जैसे- बारूद, बारूद में गंधक और कलमी सोडा होता है। इन दोनों को जलाने से उसमे gas पैदा होता है, पत्थर फूटता है, गोला फूटता है। होने के पश्चात न तो गंधक रह जाता है न कलमी सोडा रह जाता है, दोनों विकृत हो जाते हैं। उसी प्रकार से परमाणु ऊर्जा भी अपनी ऊर्जा को बहिर्गत करने के बाद वो परमाणु ऊर्जा से संपन्न रहना बनता नहीं। इसी को ये ऊर्जा के रूप में परिवर्तित होता है ये हाँक दिया। उसके बाद अभी उसमें confusion हो गया है, येन तीन, IIT के अनुसार। देखें क्या क्या कहते हैं- आज कुछ कहते हैं कल कुछ कहते हैं। जैसा भी कुछ कहें उसको सब को सुनना ही सुनना है, ठीक है ना। हम लोग एक दिन ईश्वरवादिता को ऐसे ही सुनते रहे। अभी निष्ठा से आप लोग इन बातो को हुल्लड़ बाजी को, फूहड़पन को, झूठबाजी को, धोखा धड़ी को बड़े ध्यान देकर के सुनते हो वैसे ही हम लोग ईश्वरवादिता को भी सुनते रहे। इतने ही निष्ठा से सुनते रहे कम से कम, इससे ज्यादा भी हो सकता है। वहाँ से मैं आया हूँ, हमारा यात्रा वहाँ से है।