जिज्ञासा: केवल मिश्रण को सहवास कह रहे हैं आप? किन्तु आजकल यौगिक को भी अलग कर देते है, उसको क्या कहेंगे?
उत्तर: अलग कर देने से यौगिक रहेगा नहीं ना।
जिज्ञासा: सहवास की परिभाषा एक और भी है यहाँ पर कि जिस योग के अनन्तर विलगीकरण संभव हो उसकी सहवास संज्ञा है।
उत्तर: जितना सुगमता से मिश्रण में विलगीकरण संभव है उतनी सुगमता से विलगीकरण न हो वो यौगिक है। जितनी सुगमता से दूध और पानी को अलग किया जा सकता हैं, पानी में जलने वाले और जलाने वाले को अलग नहीं किया जा सकता उसके लिए कुछ विशेष प्रयत्न करने पड़ते हैं।
जिज्ञासा: भौतिक क्रिया और रासायनिक क्रिया में क्या अंतर है?
उत्तर: दो वस्तु अपने आचरण को त्याग करके तीसरा आचरण में आ गया, यह रसायन है दोनों एक साथ रहे अपने-अपने आचरण करते रहे यह है सहवास, मिश्रण। मिश्रण क्रिया ही भौतिक क्रिया।
जिज्ञासा: ऐक्य क्या बोला है आपने बाबा, जिस योग के अनन्तर विलगीकरण न हो उसको आपने ऐक्य बोले हैं।
उत्तर: जैसा कि पानी, पानी में मिला दिया। पहला पानी भी यौगिक है दूसरा मिलाया हुआ पानी भी यौगिक है। पहले वाले पानी और बाद वाले पानी का अब विलगीकरण नहीं होगा।
जिज्ञासा: तो क्या सजातीय वस्तुओं का ही ऐक्य है?
उत्तर: सजातीय हो और वो भी यौगिक हो, एक प्रजाति के।
जिज्ञासा: दो भौतिक वस्तुओं में भी मिला देंगे तो भी तो अलग नहीं कर पाएंगे।
उत्तर: जैसा मिट्टी से मिट्टी को मिलाया आपके कहने अनुसार। आप १ किलो मिट्टी, २ किलो मिट्टी को आप अलग कर सकते हैं। यह पानी अलग है वो पानी अलग नहीं होता है ये। मिट्टी में हम पहले से ही मात्रा से मिलाते हैं। मात्रा से पहचानते हैं मिलाये हैं, मात्रा से मानते हैं निकाले हैं। इसमें जो गुण सम्पन्न हैं, यौगिक वस्तु। पानी पानी से मिलाना, ये दोनों में समान गुण हैं। वो समान मात्रा है। गुण और मात्रा में भिन्नता यही है। सामान गुण वाला मिलने के बाद पहले गुण वाला और मिलाया हुआ गुण वाला अलग-अलग दिखता नहीं। मात्रा अलग-अलग दिखता है। सामान्य सिद्धांत है। गुण भौतिक वस्तु में कम है। गुण प्रधान नहीं है मात्रा प्रधान है। (गुण किसको कह रहे हैं? ) वो जो उसका आचरण बनता है, जो दो वस्तु मिलकर के भिन्न आचरण बनता है वो गुण है। ये मूल गुण से ही रहते हैं। इसमें(भौतिक में) रूप