अपन लिखे हैं सहअस्तित्व नित्य प्रभावी, कहीं से भी यदि ठोस पदार्थ को छोड़ोगे वो ठोस पदार्थ के साथ ही अपना सहअस्तित्व को प्रमाणित करेगा, उसके पहले वह रुकने वाला नहीं है। पानी को कहीं से छोड़ोगे वो पानी के साथ ही अपने सहअस्तित्व को प्रमाणित करेगा। विरल वस्तु को कहीं से भी छोड़ोगे विरल वस्तु के साथ ही अपना सहअस्तित्व को प्रमाणित करेगा। अब गुरुत्वाकर्षण विरल वस्तु के साथ कहाँ गुम गया। अभी कोई action plan एक भी नहीं है इसमें, action plan सामने आएगा कल, तब देखना। अभी अपन केवल बात कर रहे हैं, सलाह मशवरा कर रहे हैं, शुद्ध बुद्धि से परामर्श कर रहे हैं। 

जिज्ञासा: पदार्थ राशि का वर्गीकरण चार जातियों में है- ये क्या है? 

उत्तर: मृद, पाषाण, मणि, धातु के रूप में है। ये सभी पदार्थ राशि को हम जोड़ेंगे- मट्टी, पत्थर, मणि, धातु के रूप में हमको मिलता है। इसमें ये भी देखा गया मृद, पाषाण- मणि और धातु के रूप में परिवर्तित होता हुआ और मणि धातु - मृद पाषाण के रूप में परिवर्तित होता हुआ देखा गया, होता ही है। इस प्रकार से परिणाम सतत बना रहता है, श्रम, गति, परिणाम के आधार पर। तो बनते-बनते अपनी कोई गम्य स्थली है वहाँ तक पहुँचते हैं उसके बाद आगे स्थिति को पैदा करते हैं। बताया प्राणावस्था का बीज पदार्थावस्था में रहता ही है, तभी प्राणावस्था पैदा हुआ। यह धरती पर गवाहित है। और उसी प्रकार प्राणावस्था में जीवावस्था का बीज समाया रहता है, जीवावस्था पैदा हुआ ही है, प्रगट है ही। जीवावस्था में ज्ञानावस्था का बीज बना ही रहता है। ज्ञानावस्था प्रगट हुआ ही है। 

जिज्ञासा: यौगिक में भौतिक तथा रासायनिक परिणाम होते हैं जबकि मिश्रण में केवल भौतिक परिणाम होता है? 

उत्तर: मिश्रण को सहवास बताया, जैसे पानी और दूध यह सहवास किये रहते हैं, यौगिक नहीं हुए रहते हैं। उसी प्रकार से कई चीज़ एक दुसरे के साथ रह सकते हैं वो कभी भी परिणित नहीं हुए रहते हैं।यदि पानी को जला दें दूध मिल ही जाएगा। उसी प्रकार से यदि हम सोचते हैं ये जलने वाला और जलाने वाला वस्तु मिलकर के पानी बन गया, पानी को जलाओगे तो बाद में एक जलने वाला एक जलाने वाला मिल जाये ऐसा होता नहीं। वो जलाओगे तो वो वाष्प में भी वैसे ही रहता है, पुनः वाष्प पानी ही बनता है। यदि इन दोनों वस्तुओं को अलग कर दिया उसके बाद पानी रहेगा नहीं। पानी रहे और ये दोनों वस्तु अलग हो ऐसा होता नहीं। यौगिक का मतलब है दो वस्तु, कम से कम, अपने-अपने आचरण त्याग करके तीसरे प्रकार के आचरण में शुरू किया। सहवास का मतलब है साथ साथ में रहते हैं अपने-अपने गुणों से।

जिज्ञासा: तो बाबा सहवास में अपना आचरण नहीं त्यागते?

उत्तर: कहाँ त्यागते हैं, दूध और पानी को मिलाकर रखोगे तो पानी कब त्यागा रहता है अपने आचरण को, दूध कब त्यागा रहता है? यदि त्यागा होता तो पानी को जला देने से दूध कैसे मिलता।

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