विज्ञान का जो लक्ष्य है आज? चंद्रमा पर जाना, सैर कराना, पैसा पैदा करना एक हुआ, दूसरी ओर पूरा का पूरा border में fission, fusion को बिछा के रखना, ये लक्ष्य विज्ञानियों के लिए जो बनाए हैं, क्या ये ठीक है? और या ये ठीक है। क्या? मानव लक्ष्य जीवन मूल्य प्रमाणित होना ठीक है। यदि जीवन मूल्य प्रमाणित होना है, मानव लक्ष्य पूरा होना है उसके लिए विज्ञान को अपनाया जाए। तकनीकी ठीक है। तकनीकी के बारे में अपन स्वीकारा है, तकनीकी से जो मट्टी कोड़ते हैं, मट्टी कुड़ा जाता है। यंत्र बनाते हैं, यंत्र बन जाता है। इसमें technique में क्या गलती है। technique को उपयोग करने में, गलती-सही है। वो गलती-सही को इस ढंग से जोड़ा जाये- मानव लक्ष्य, जीवन लक्ष्य को पूरा करने के अर्थ में जोड़ा जाए। ऐसा अपन प्रस्तावित किए हैं, इसका नाम दिए हैं विकल्प। विज्ञान का विकल्प, ज्ञान का विकल्प दिया, विवेक का विकल्प दिया। पहले विकल्प में कहा है, हमारे बुजुर्गों ने, आत्मा का अमरत्व, शरीर का नशवरत्व को स्वीकारना विवेक बताया। अपन क्या लिखे हैं? जीवन का अमरत्व, शरीर का नशवरत्व, व्यवहार के नियम, इन तीनों एकत्रित होने से विवेक कहा। और उसके पहले क्या कहा, यदि विवेक आता है तो मानव लक्ष्य समझ में आ गये। क्या समझ में आ गये? समाधान, समृद्धि, अभय, सहअस्तित्व पूरा हुआ, इसके लिए विज्ञान को प्रयोग किया जाए। किसके लिए? समाधान, समृद्धि, अभय, सहअस्तित्व सम्पन्न होने के लिए विज्ञान सिद्धांतों को प्रयोग करना शुरू करें। वो कैसा किया जाए? उसके लिए कर्म दर्शन में कुछ बातों को लिखा है, यदि कमी पड़ती है उसको पूरा करने के लिए मैं बैठा हूँ।
उसके बाद आता है जीने में, परिवार में जीना। और उसके बाद परिवार के बाद अड़ोस-पड़ोसों के सम्बन्धों में जीना, ग्राम के सम्बन्धों में जीना, देश के सम्बन्धों में जीना, सब पूरा धरती पर जितने मानव हैं उनके सम्बन्धों में जीना। ये कैसे बनता है पूछे, तो मानव धर्म एक होता है इसलिए विचार जो है ना धर्म के अनुरूप होने की बात आ गयी। सारे विचार समाधानित होने की बात आ गयी, इसको हर व्यक्ति पा सकता है। समाधान सम्पन्न विचारशैली को पा सकता है। किस विधि से? मानव लक्ष्य जीवन लक्ष्य के पूरा होने के आधार पर समाधान को हर व्यक्ति पा सकता है, ज्ञान मूलक विधि से। ये अपन प्रस्ताव रखा, ये विकल्प हुआ कि नहीं हुआ? तो ऐसा विकल्प रखा। विकल्प रखने के बाद, यह कहा यदि मानव लक्ष्य पूरा होता है, जीवन लक्ष्य पूरा होता है। मानव लक्ष्य पूरा होने से अखंड समाज हो ही जाता है। जीवन लक्ष्य पूरा होने से सार्वभौम व्यवस्था हो ही जाता है। क्या बात है! जीवन लक्ष्य पूरा होने की स्थिति में सार्वभौम व्यवस्था अवतरित होता ही है। अखंड समाज ताना-बाना बनने की पहले स्वाभाविक रूप में मानव लक्ष्य पूरा हो ही जाता है। मानव लक्ष्य यदि एक व्यक्ति का मानेंगे वो पुनः संग्रह, सुविधा ही आएगी। व्यक्ति, परिवार के सीमा में सोचेंगे, व्यक्ति के सीमा में ही सोचना बनता है संग्रह सुविधा को, परिवार जायेगा उधर, कगरियाएगा, परिवार भी व्यक्ति का साधन रूप में उपयोग करना होता है। ऐसा है काम-धाम। अभी तक तो ऐसा ही है गवाही। ठीक है। इसमें क्या होता है, हर व्यक्ति, समाधान सम्पन्न होने की आवश्यकता है परिवार में, किसी ना किसी अवस्था तक में, उसके लिए १६ वर्ष से २० वर्ष के बीच में अपन सोच रहे हैं, क्योंकि अभी के स्थिति में मानव की स्थिति में इससे पहले होना इतना आसान game नहीं है। ज़्यादा से ज़्यादा जल्दी से जल्दी होगा तो १६ वर्ष तक होगा, धीरे से धीरे होगा तो २० वर्ष तक होगा। ऐसा एक अन्दाज़ लगाए हैं। इतने में क्या होगा? समाधानित होने की दिन आएगी। ऐसा हर व्यक्ति को शिक्षा का प्रावधान होना चाहिए। क्या बात है ! ऐसा होना चाहिए या एक दूसरे का जेब काटने के लिए होना चाहिए? आप ही बताओ मेरे को, आप ही सोचो, आप ही चार जने महान हैं, आप ही सोच लो? तो मनुष्य अपनी उपयोगिता को enhance करना है, या ये जो दुष्कर्मों को enhance करना