उत्तर: उन्होंने बताया की ये १००० किलो मीटर दूर से एक दूसरे से बात कराया, military के generals को बुलाया और पूछा कि ये क्या हमारे अनुकूल है। उन्होंने कहा की अनुकूल नहीं है, दुश्मन इसको पाएगा और उसके बाद हम पर ज्यादा हमला करेगा। आज ये मोबाइल सभी स्कूल के प्राइमरी तक के बच्चों की जेब में वो रखा हुआ है। उनको आज भी अच्छा आदमी मान कर हम आज भी याद करते हैं, जिनका विवेक इतना अच्छा रहा। एक उदाहरण दिया।
जिनका चाचा या दादा रहे, वो अपने में supreme court के legal consultancy का conference का वो president था, वो आदमी अपने पिता का श्राद्ध करने अमरकण्टक आया, उसने हमें ये बात बताया। अभी आज की स्थिति में क्या है सोच लो, ये 20-25 वर्ष पीछे की बात है, उस समय में mobile था नहीं, उस समय में बताया। अभी हर बच्चों के जेब में ये मोबाईल रखा हुआ है। अभी बच्चों के लिए क्या ये साधन है, क्या उनकी पढ़ाई का साधन है क्या? नहीं है। नाजायज प्रेम वार्ता का साधन है। आप जांच कर लीजिए, कुछ भी कर लीजिए, आपको मिलेगा यही। नाजायज शरीर संबंधों के लिए वार्ता के लिए है ये। सर्वाधिक वार्ता यही इसमें मिलेगा। अब इसको क्या करोगे?
पहले हमारे में इसका उपयोगिता कहाँ है, उसको हम यदि बोध कराए बिना कोई चीज़ को देते हैं, उसका जैसा आदमी है वैसा उपयोग करेगा। आदमी जात को संवेदनशीलता के जगह में से और कुछ सोचने समझने जीने के लिए तो अपन मार्गदर्शन कर नहीं पाए। कोई भी मिशन नहीं कर पाया। सभी मिशन अरबों खर्बों खर्च किया, काहे के लिए, अपना जात अपना धर्म को बढ़ाना। अभी सर्वाधिक लोग ये मानते हैं, जाति के साथ धर्म रहेगा। इसके पहले राजा के साथ धर्म रहेगा। तो पहले राजा जिस धर्म को अपनाया उसी धर्म में सारे देश के देशवासी होंगे, यह एक बार प्रयोग हो चुकी है। अभी क्या माना जा रहा है, हमारा जाति के साथ हमारा धर्म बढ़ेंगे, हमारा जाति और धर्म बढ़ने से हम धरती पर राज्य करेंगे। ये कुल मिला करके कथा भारत है। उसको हमारे में लिखा है वीर भोग्या वसुंधरा, ये लिखा है। ये सब हम सुने ही हैं। इस पे क्या निष्कर्ष निकाला जाए बताओ। कैसा किया जाए?
अब उसका विकल्प रखा- अखंड समाज सार्वभौम व्यवस्था। अखंड समाज सूत्र में मानव, मानवत्व, मानवीयता पूर्ण आचरण, मानवीयता पूर्ण व्यवस्था, मानवीयता पूर्ण समाज, चार चीज़ को अपन अध्ययन कराया। विकल्प हुआ कि नहीं हुआ ये? इसको हम विकल्प कहते हैं। इससे बचने के लिए सारा टंटपोली से बचने के लिए यदि हम कुछ कर रहे हैं, उसको हम विकल्प मानते हैं। ये सही है कि गलत है? पहले अभी अच्छे लोग सब एकत्रित हो गए हैं इसको निर्णय किया जाए, यदि सही है तो विकल्प को ठीक माना जाए। इसको हम विकल्प कहते हैं। कैसे पकड़ कैसे आ गया- तो अस्तित्व को हम व्यवस्था के रूप में देखा, व्यवस्था का मूल स्वरूप परमाणु अंशों से ही शुरू हुई है। परमाणु का गठन का बीज रूप परमाणु अंशों में ही निहित रही, तभी वो बिना किसी engineer, बिना किसी विद्वान, विज्ञानी, अज्ञानी, ज्ञानी के वो अपने स्वयं स्फूर्त विधि से परमाणु हुआ। इसके बारे में सहअस्तित्व का वैभव बताया, उसके आधार पर ये सब आगे चले। उसी प्रकार सभी जगह में जो मानव हुआ है, मानव में ही मानव चेतना, देव चेतना, दिव्य चेतना का बीज रखी हुई है। वो फलित कैसे होगा- जीव चेतना से मानव चेतना में परिवर्तित होने के बाद, देव चेतना शुरुवात होगी। देव चेतना फलित होने के बाद और दिव्य चेतना प्रमाणित होगा। ठीक है। इसको