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भाग – 10
👉 विडिओ संदर्भ देखें: Satsang Raipur Bhag-10
जिज्ञासा: बाबा आपके दर्शन को समझने और समझ कर आचरण में ढालने के लिए क्या हमें भी साधना के उन्ही सोपानों से प्रक्रिया और स्तरों से गुजरना ज़रूरी है, जैसा आप गुजरे?
उत्तर: उसके लिए तो पहले इस बात को तय कर लिया कि ये साधना प्रक्रिया एक घटना विधि है, क्रम प्रक्रिया नहीं है, या परम्परा के रूप में प्रक्रिया नहीं है। यह घटनावादी प्रक्रिया है। किसी को समाधि हो सकता है, किसी को नहीं हो सकता। समाधि सबको होगा इसको कहा नहीं जा सकता। समाधि होता है इतना ही मेरा बयान है, सब को होगा ये मेरा बयान नहीं हैं। समाधि एक घटना के रूप में घटित होता है, इसको मैंने देखा है।
अब ये शिक्षण विधि हो नहीं सकती, इस आधार पर जो हमने अस्तित्व को अध्ययन किया है, उसको अध्ययन कराने की प्रक्रिया स्थापित किया। अध्ययन करने के लिए ध्यान देना पड़ता है, अनुभव के बाद ध्यान रहता है, ये सूत्र लिखा।
अध्ययन के लिए ध्यान देना पड़ता है, अध्ययन होता है तो अनुभव होता ही है, अनुभव के बाद ध्यान रहता ही है।
जिज्ञासा: बाबा ‘अध्ययन’ शब्द को एक बार और स्पष्ट करिए।
उत्तर: इसका सूत्र रूप यह है- हम भाषा से बात करते हैं, कुछ भी बात करते हैं उस भाषा का एक अर्थ होता है। भाषा के अर्थ में वस्तु के रूप में अस्तित्व में समझ में आना। अस्तित्व में वस्तु के रूप में समझ में आ गया, वो भाषा का अर्थ हमको समझ में आया।
उसका प्रमाण क्या है- पानी एक शब्द है, पानी एक वस्तु है। पानी एक शब्द से प्यास बुझता नहीं, पानी नाम की वस्तु से प्यास बुझता है, ये आपको पता है, कुत्ता को भी पता है। आप हम को तो पता ही है, कुत्ते को भी पता है, इतना generalise हो चुकी है। एक झाड़ को भी पता है, पानी से हरियाली स्वस्थ रहता है, जीवों को तो है ही, मनुष्य को तो है ही, इस ढंग से सबको ये विदित है। अब आगे की बात आता है न्याय, धर्म, सत्य, नियम, नियंत्रण, संतुलन, ये मनुष्य में ही समझ में आएगी, ये कुत्ते में समझ में नहीं आएगी, ये झाड़ में समझ में नहीं आएगी, ये बाघ में समझ में नहीं आएगी, ना भालू में आएगी, ना गाय में आएगी। मनुष्य में ही आने के लिए जो ये छह digit बताया-