9

भाग – 9

👉 विडिओ संदर्भ देखें: Satsang Raipur Bhag-9

जिज्ञासा: सहअस्तित्व मूलक मध्यस्थ दर्शन को आपने प्रकट किया है, ऐसा विकल्प film में कहा गया है, इस मध्यस्थ दर्शन को आगामी फिल्म में किस तरह से दिखाया जाए या दिखाया जाना चाहिए कृपया बताएं?

उत्तर: आगे की जो एक चित्रमाला बनाना चाह रहे हैं, उसमें जो शुरुआत बात है, उसमें हम कैसे कुलशील में पैदा हुए और कैसे हमारे कुलशील की कट्टरपंथी थी, उसको स्पष्ट किया जाए और उसमें जो हमको तकलीफ़ हुई, पीछे की चित्रमाला में स्पष्ट की। अभी उसके बाद वो जो हम पाए हैं, उसको किस क्रम में प्रस्तुत किया जाए ये वाला बात है। उसके लिए ये भी बात पूरा हो गई है, पूरा दर्शन के क्रम में क्या प्रयोजन है, इसको सामान्य रूप में वक्तव्य के रूप में दिया है और लिखित रूप में दर्शन, विचार और शास्त्रों को प्रस्तुत किया है, मानव के कर कमलों में। उसको पहले हम एक सूचना के रूप में ये जो चित्र माला प्रस्तुत कर रहे हैं, उसमें यही होना चाहिए- इस दर्शन की सारभूत बात क्या चीज है (विकल्प के रूप में) वो थोड़ा सा अच्छे ढंग से प्रस्तुत हो। जिसको हमने एक प्रकार से रिकॉर्ड कर लिया है।

क्रम रखने का बात यही आती है- पहले इस दर्शन का प्रयोजन क्या है। रखा कैसा जाए उसके बाद हम अपनाए हैं, इसको एक लोक शिक्षा विधि से एक सूचना को पहले देंगे, क्योंकि प्रचलित है ही नहीं। प्रचलित मानसिकता से इसको सुना भी नहीं जा सकता, प्रचलित मानसिकता से इसको बोध किया भी नहीं जा सकता। इसको प्रचलित मानसिकता से सुनने से इसको सुना नहीं जा सकता है, उठ के चले जाना ही पड़ता है। प्रचलित मानसिकता से इसको बताया भी नहीं जा सकता। इसको प्रचलित मानसिकता को ताक में रख करके ही सुनना होगा और सुनाना होगा। इसमे हम सहमत हो पाते हैं, यदि सहमत हो पाते हैं, तब आगे की बात आती है। यदि हमारा सूचना से ये पता लगता है, मानव अपने में विश्वास अर्जन करना पहला काम है। इसके पहले विश्वास को कहाँ अटकाया, ले जा करके ईश्वर के साथ विश्वास जोड़ो, श्रद्धा करो। हम यहाँ क्या कहते हैं- मनुष्य के साथ विश्वास करो, श्रेष्ठता के प्रति श्रद्धा करो। इस आधार पर हम आगे बढ़ते हैं। मनुष्य अपने में सुख, शांति से जीना चाहता है, इसको हम पकड़े हैं। मानव मानस को इसको पकड़े हैं सुख, शांति पूर्वक जीना चाहता है। इसी के लिए सभी अच्छा कहलाने वाले, सभी बुरा कहलाने वाले कार्यों को किया। बुरा कार्यों से शांति का साधन नहीं हुआ, अच्छा कहलाने वाले कार्य से भी शांति का साधन नहीं बना। जीव चेतना विधि से जितना भी अच्छा-बुरा सोच पाया, निर्णय ले पाया, अच्छे से भी

Page 59 of 94
55 56 57 58 59 60 61 62 63