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भाग – 11

👉 विडिओ संदर्भ देखें: Satsang Raipur Bhag-11

जिज्ञासा: क्या ईश्वर का साकार रूप भी है, और क्या उसका साक्षात्कार संभव है, जैसा आपके समक्ष बनारस में हुआ? 

उत्तर: ये बहुत अच्छी बात है, इस पर तो विचार होना चाहिए क्योंकि साकार निराकार की बहुत बड़ी भारी चर्चाएं हुई हैं। ये सम्माननीय तर्क भी है और विचार भी है। सम्मान करने योग्य तर्क भी है, इसके लिए समाधान है, वो भी उतना ही सम्मान करने योग्य है। ऐसा मेरा प्रस्ताव है।

उसमें हम ये बताना चाहते हैं कि अस्तित्व को यदि समझना है, इसमें साकार निराकार अलग-अलग होता नहीं। हमारा प्राण संकट- साकार अलग है, निराकार अलग है। हमारा अभी तक का जो प्राण संकट पूर्वजों ने हमको दिया है- ये साकार एक अलग चीज़ है, निराकार एक अलग चीज़ है। उसको हमने कैसा देखा है, साकार निराकार सदा-सदा एक साथ ही रहते हैं। यदि ये अच्छी तरह से समझ में आता है, इसमें हम ९९% समस्या का समाधान है। ९९% समस्या का समाधान है, यदि ये समझ में आ जाती है साकार निराकार अलग-अलग जिंदगी नहीं है। इसको मैंने वचन में लिखा है सहअस्तित्व अपने में नित्य वर्तमान है। साकार वस्तु के बिना निराकार का ज्ञान (पहचान), निराकार के बिना साकार वस्तु में ऊर्जा संपन्नता का स्रोत नहीं है। इतना लिखा है। इससे ज़्यादा क्या अक्षर में लिखा भी जा सकता है, लिखना चाहिए? आप सोचो। इतना बढ़िया लिखा है, इससे अच्छा कोई अच्छा आदमी के लिए लिखा नहीं जा सकता। इतना बढ़िया लिखा है, इस सूत्र को पचाने की ज़रूरत है। इसका मतलब क्या हुआ, निराकार साकार साथ में रहने के आधार पर ही निराकार को भी हम पहचानते हैं, साकार को भी पहचानते हैं। यदि एक साथ ना हों, दोनों पहचानना बनता नहीं। उसका गवाही क्या है? साकार को पहचानने गए विज्ञानी, पहचाना नहीं और निराकार को पहचानने गए ज्ञानी, वो पहचाना नहीं। ये गवाहित हो चुकी है। यदि सिर कूटना हो तो और बात, ठीक है, कूट लें, चूर कर लें। ये दोनों का गवाही हो चुकी है अस्तित्व में सात सौ करोड़ आदमी के सामने। यदि पिछले को ध्यान देंगे तो ये दोनों का गवाही हो चुकी है। विज्ञानी साकार को लेकर सत्य को खोजना शुरू किया और ज्ञानी निराकार को लेकर सत्य को खोजना शुरू किया, दोनो खोजते ही रह गए सबका खोपड़ी चूर हुआ, खाद हो गया, सत्य का अता-पता नहीं हुआ। आज तक कोई विज्ञानी “यह सत्य है” कहने योग्य नहीं है। कोई भी ज्ञानी यह सत्य है कहने योग्य, प्रमाणित करने योग्य एक भी ज्ञानी इस धरती पर नहीं है। इस धरती पर तो नहीं है। ये मेरी ज़िम्मेवारी

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