नियम, नियंत्रण, संतुलन, न्याय, धर्म, सत्य इसको समझने का जो काम है, ये मनुष्य के पास ही है। इसी का नाम है “ज्ञान”। ये समझ में आता है तो उसी से जुड़ी हुई विवेक विज्ञान। ये नियम, नियंत्रण, संतुलन, न्याय, धर्म, सत्य ये छः चीज़, इसमें यदि हम इसमें पारंगत हो जाते हैं तो उस स्थिति में ज्ञान, विवेक, विज्ञान सम्पन्न होना बन जाता है। यदि ये बात बनता है कि हम नियम, नियंत्रण, संतुलन पूर्वक अस्तित्व में वस्तु को पहचान पाते हैं, ये वस्तु नियम पूर्वक है, ये वस्तु नियंत्रण पूर्वक है, ये संतुलन पूर्वक है, ये न्याय पूर्वक है, धर्म पूर्वक है, सत्य पूर्वक है- ये बात यदि अनुभव में आ जाता है, ये अनुभव में ही आएगी, दूसरे विधि से नहीं आएगी, इसको हम दूसरा विधि से पा जाएं ये होगा नहीं। अनुभव में ही आएगी ये छः चीज। ये अनुभव में आ जाने वाले चीज को अस्तित्व में वस्तु के साथ सहअस्तित्व रूप में पहचानने की ज़रूरत है।