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भाग – 12
👉 विडिओ संदर्भ देखें: Satsang Raipur Bhag-12
जिज्ञासा: विकल्प एक परिचयात्मक film है, उसके दूसरे भाग में जो कि हमारी भविष्य की प्रस्तावित फिल्म है उसका विषयवस्तु का ढाँचा, उसका स्वरूप कैसा होना चाहिए?
उत्तर: उसके बारे में अपन चर्चा कर चुके हैं, इसके अंत में प्रयोजन के बारे में बात करेंगे, प्रयोजन इसका अखंड समाज सार्वभौम व्यवस्था ही निकलना चाहिए। समझदार व्यक्ति, समाधान, समृद्धि सम्पन्न परिवार, ये पाँचों आयामों से सम्पन्न व्यवस्था और अखंड समाज सार्वभौम व्यवस्था प्रमाण परम्परा के रूप में ये प्रस्तावित होने की कथा लिखे हैं, वही चीज़ में ये चित्रमाला भी अंत होना चाहिए।
जिज्ञासा: जीवन विद्या के बारे में बोल दीजिए।
उत्तर: जीवन विद्या में जीवन ज्ञान के बारे में सूचना है, जीवन ज्ञान होने के मूल में सहअस्तित्व का सूचना है। सहअस्तित्व में ही जीवन है, सहअस्तित्व में ही विकास क्रम, विकास, जागृति क्रम, जागृति प्रमाणित हुई है। अभी जागृति क्रम में मानव है, जागृति को प्रमाणित करना शेष है। जागृति के बारे में ये लिखा है जो जीव चेतना से मानव चेतना में परिवर्तित होने पर एक संक्रमण हुआ। इसको हम क्रिया पूर्णता नाम दिया है। इसमें हर व्यक्ति के पास सर्वतोमुखी समाधान करतलगत रहेगा। फलस्वरूप अखंड समाज में जीने का अधिकार होता है। अखंड समाज में जीने का अधिकार होने के आधार पर अखंड समाज व्यवस्था का परिकल्पना आता ही है। उसको दश सोपान विधि से बता दिया। उसको अभी एक गाँव में प्रमाणित करने के लिए प्रयत्न भी चल रहे हैं। इस आधार पर इसका प्रयोजन क्या है- अखंड समाज सार्वभौम व्यवस्था, परिवार में समाधान, समृद्धि प्रमाणित होना। तीन जगह के प्रमाण हैं, परिवार में, समाज में और व्यवस्था में प्रमाण। व्यवस्था में सार्वभौमता प्रमाणित होना है, समाज में अखंडता प्रमाणित होना है, परिवार में समाधान, समृद्धि प्रमाणित होना है। इसको यदि हम सही मान पाते हैं, उस पर प्रयोग करना शुरू करना चाहिए।
जिज्ञासा: आगामी film का शीर्षक क्या रखें?