पड़ता है। इससे स्पष्ट होता है कि अरूपात्मक अस्तित्व में ही सम्पूर्ण रूपात्मक अस्तित्व सम्पृक्त एवं ऊर्जा सम्पन्न है। प्रत्येक इकाई में ऊर्जामयता का साक्ष्य परमाणु के पूर्व रूप में और परमाणु के पररूप में क्रियाशीलता से स्पष्ट है।
Table of contents
Jump to any page
-2
मूल तत्व अवलोकन
-1
टिपण्णी
1
प्रणेता संदेश
2
अध्याय 1: भूमिका
13
अध्याय 2: सहअस्तित्व रूपी अस्तित्व
68
अध्याय 3: चैतन्य “जीवन”
131
अध्याय 4: मानवीयतापूर्ण आचरण
205
अध्याय 5: परिवार व्यवस्था में जीना
230
अध्याय 6: मानवीय परम्परा – अखंड समाज, सार्वभौम व्यवस्था
290
अध्याय 7: सारांश
314
अध्याय 8: वाङ्मय एवं अध्ययन