अध्याय 2: सहअस्तित्व रूपी अस्तित्व
2.1 सहअस्तित्व, विकासक्रम, विकास, जागृतिक्रम, जागृति
मानव अस्तित्व में ही कार्य-व्यवहार, विचार और अनुभव करना चाहता है। अस्तित्व में, अस्तित्व के अतिरिक्त समझने, सोचने, कार्य-व्यवहार अथवा अनुभव करने का कोई आधार नहीं होता, क्योंकि अस्तित्व से अधिक और कम सभी कल्पनायें भ्रम ही होती हैं।
भ्रम का तात्पर्य सत्य सा प्रतीत होते हुए सत्य न होना है। अस्तित्व सत्ता में अर्थात्, अरूपात्मक अस्तित्व में सम्पृक्त प्रकृति (रूपात्मक अस्तित्व) है। इसलिए अध्ययन के लिए सम्पूर्ण वस्तु अस्तित्व ही है। – भ.व. 63 – 71
सहअस्तित्व = व्यापक सत्ता (*अरुपात्मक अस्तित्व, शून्य) में संपृक्त (*भीगा, डूबा, घिरा) जड़-चैतन्य प्रकृति (रूपात्मक अस्तित्व)
समस्त परिणाम, परिमार्जन एवं परिवर्तन पाँच प्रकार से दृष्टव्य है:-
(1) सह-अस्तित्व रूपी अस्तित्व में (2) विकासक्रम (3) विकास (4) जागृति क्रम (5) जागृति।
पदार्थावस्था परिणाम पूर्वक यथास्थिति पूरक रूप में प्रयोजनशील है। प्राणावस्था परिणाम पूर्वक स्पन्दन, पुष्टि सहित रचनाशील यथास्थिति व पूरक के रुप में प्रयोजनशील है। जीवावस्था परिवर्तन, परिणाम सहित जीने की आशा पूर्वक यथास्थिति पूरकता सहित प्रयोजनशील है। मानव ज्ञानावस्था में गण्य है। यह परिमार्जन पूर्वक जागृति और जागृति पूर्णता सहज परम्परा है। यही यथास्थिति पूरकता रूप में प्रमाण होना पाया गया है।
अरूपात्मक अस्तित्व की पहचान
अरूपात्मक अस्तित्व स्वयं में निरपेक्ष ऊर्जा के रूप में वैभवित है। यह गति, तरंग, दबाव विहीन नित्य वर्तमान स्थिति में है। साथ ही सर्वकाल में एक सा विद्यमान भासमान और बोध व अनुभवगम्य है। इसी सत्यतावश अरूपात्मक अस्तित्व मूल रूप में साम्य ऊर्जा, परम ऊर्जा अथवा निरपेक्ष ऊर्जा के अर्थ में नित्य विद्यमान है। यही निरपेक्ष सत्ता है। इसे हर एक-एक की परस्परता के मध्य में होना पाया जाता है। (‘आप हमारे बीच जो खाली स्थली है, वही व्यापक वस्तु है’ -१९९९)
''सत्ता स्थितिपूर्ण है। सत्ता में सम्पृक्त प्रकृति स्थितिशील है।” सत्ता स्थितिपूर्ण होने की सत्यता उसकी व्यापकता से सिद्घ होती है क्योंकि अरूपात्मक अस्तित्व न हो, ऐसा कोई स्थान और काल सिद्घ नहीं होता।
सत्ता में सम्पृक्त प्रकृति अनन्त इकाइयों का समूह है। इकाई का तात्पर्य छ: ओर से सीमित पदार्थ पिण्ड से है। प्रकृति की मूल इकाई परमाणु हैं क्योंकि परमाणु में ही विकास और ह्रास सिद्घ होती है। परमाणुओं का निश्चित गतिपथ सहित अस्तित्व में होना पाया जाता है। ऐसे गति पथ और परमाणु अंशों के सभी ओर अरूपात्मक अस्तित्व दिखाई