जागृत जीवन में ही होने वाली क्रिया, अभिव्यक्ति, संप्रेषणाओं का विश्लेषणपूर्वक उन-उन आचरणों को सार्थक विधि से इंगित करने की प्रक्रिया प्रस्तुत है। सहअस्तित्व में सम्पूर्ण क्रियाएँ आचरण में गण्य हैं और मानव कुल में सम्पूर्ण आचरण विश्लेषणपूर्वक इंगित होना संभव है। इसलिए सम्पूर्ण अस्तित्व ही अध्ययन सुलभ हुआ।
प्रत्येक मानव जीवन रूप में समान है, यह बल-शक्ति, क्रिया और लक्ष्यों के रूप में समान होना देखा गया है। इसी आधार पर अर्थात् जीवन के आधार पर ही जीवन सहज क्रियाकलाप प्रत्येक मानव को समझ में आना सहज संभव है। जीवन में पाँच आयाम बल और शक्ति के रूप में पहले से ही इंगित किया जा चुका है। जिसमें से मन जीवनबल है और आशा जीवनशक्ति है। इसी प्रकार वृत्ति-विचार, चित्त-इच्छा, बुद्धि-ऋतम्भरा और आत्मा-प्रामाणिकता के रूप में अध्ययनगम्य है। इन्हीं अक्षय बल, अक्षय शक्ति के चलते मन में चौंसठ (64) आचरण, वृत्ति में छत्तीस (36) आचरण, चित्त में सोलह (16) आचरण, बुद्धि में चार (4) आचरण और आत्मा में दो (2) आचरणों को पहचाना गया है। यह प्रस्तुत है।
भ्रमित मानव मन की क्रियाएँ सर्वाधिक मान्यताओं के आधार पर सम्पन्न होती हुई दिखाई पड़ती हैं। मान्यता का आधार शरीर, इन्द्रिय और इंद्रिय संवेदनाएँ हैं। इन पर आधारित मान्यताओं से प्रत्येक मानव समस्याग्रस्त रहता है। प्रमाणिकता के लिए मन अनुभव मूलक विधि से क्रियायों को संपन्न करता है। यह विचार, इच्छा, ऋतम्भरा, प्रामाणिकता सहज क्रम मे जीवन जागृति का प्रमाण प्रस्तुत होता है।
“मानव संचेतनावादी मनोविज्ञान” में जीवन जागृति विधि सम्पन्नता को स्पष्ट किया गया है। आस्वादन क्रम में भी नियम पूर्वक इन्द्रिय संवेदनाओं का आस्वादन नियम, न्याय, धर्म, सत्यात्मक वैभव का आस्वादन, अखंड सामाजिकता का आस्वादन, सार्वभौम व्यवस्था का आस्वादन और अस्तित्व में अनुभव का आस्वादन यह जागृतिपूर्णता की विधि है।
अजागृत मानव मन का सहज कार्यकलाप इन्द्रियों की तादात्मता वश, इन्द्रिय संवेदनाओं को सत्य समझने के आधार पर अथवा शरीर को जीवन मान लेने के आधार पर भ्रमित होना पाया जाता है। इसी के पक्ष में जीवन सहज विचार और इच्छा संयुक्त होकर कल्पनाशीलता का प्रसव और कार्य होते ही रहता है। आलंबन के लिए प्रिय, हित, लाभात्मक दृष्टियाँ कार्यरत हो जाती हैं, फलस्वरूप इन्द्रिय तृप्ति के लिए दिवारात्रि सोचता हुआ, कल्पना करता हुआ, चित्रित करता हुआ, प्रयास करते हुए, प्रयोग करते हुए मानव को पहचाना जा सकता है। इस प्रकार मान्यता