दृष्टा है इस आधार पर सम्पूर्ण अस्तित्व ही जीवन में, जीवन से, जीवन के लिए दृश्य है - यह समझ में आता है। इस तथ्य से यह स्पष्ट है कि अस्तित्व ही सभी अवस्थाओं में अथवा पदों में वर्तमान रहता है। अस्तित्व में ही दृष्टा पद प्रतिष्ठा भी वर्तमान है। मानव संचेतनावादी मनोविज्ञान जागृतिपूर्ण जीवन का अध्ययन है और मानव परम्परा में प्रमाणित होने की विधियों से सम्पन्न है।

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