हुए, संकेतिक करते हुए जीवन जागृति के प्रमाणों को कार्य व्यवहार में प्रमाणित करता है। इसी क्रम में जागृत जीवन सहज संचेतना का प्रमाण सहज सुलभ हो जाता है। प्रमाण मानव परम्परा में ही सम्पन्न हो पाता है। हर मानव में प्रमाण सहज अपेक्षा बना ही रहता है। ऐसे मन में प्रमाणित होने वाली क्रियाओं का आंकलन किया गया है। यह सभी क्रियाऐं 64 संख्या में होना पाया गया है। इन 64 क्रियाओं को पहले एक-एक क्रिया की अपनी पहचान अध्ययन पूर्वक समझ में आने के उद्देश्य से स्पष्ट की जा चुकी है।

॥ नित्यम् यातु शुभोदयम् ॥

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