इन सबके अपने-अपने कार्य परिभाषित, व्याख्यायित रहेंगे।
ऊपर कहे स्वराज्य व्यवस्था में सभी समितियाँ सहित ढाँचे का स्वरुप- निम्नलिखित सभी स्तरों में, निर्वाचन कार्य में दस व्यक्तियों के बीच, एक व्यक्ति होगा। ग्राम सभा तक त्रि-स्तरीय समितियाँ होना आवश्यक है। चौथा - ग्राम समूह सभा। पाँचवाँ - क्षेत्र सभा। छठा - मंडल सभा। सातवाँ - मण्डल समूह सभा। आठवाँ - मुख्य राज्य सभा। नवमा - प्रधान राज्य सभा। दसवाँ - विश्व परिवार स्वराज्य सभा। इस विधि से निर्वाचन कार्य में धन या वस्तु लगने की आशंका समाप्त हो जाती है। धन या वस्तु के साथ निर्वाचन कार्य को जोड़ना स्वयं निर्वाचन कार्य की पवित्रता का हनन सिद्घ हुआ हैं। इसका साक्ष्य मानव को मिल चुका हैं।
परिवार मूलक स्वराज्य, समझदारी मूलक स्वायत्त मानव परिवार है। समझदारी की संपूर्णता ही जीवन ज्ञान, अस्तित्व दर्शन एवम् मानवीयतापूर्ण आचरण है। व्यवस्था के क्रियान्वयन करने के मूल में, प्रत्येक परिवार को जीवन विद्या में पारंगत बनाने की व्यवस्था रहेगी। जीवन विद्या का विस्तृत कार्य, प्रयोजन, संभावना, सुलभता के संबंध में “अस्तित्व में परमाणु का विकास”- अध्याय में स्पष्ट है। “अस्तित्व मूलक मानव केन्द्रित चिंतन” के रूप में “मध्यस्थ दर्शन, सहअस्तित्ववाद” है। इसमें अस्तित्व दर्शन को विविध प्रकार से स्पष्ट किया गया है।
[88q88\