छूटना चाहता है। इसके लिए सहज उपाय है - “मानव अपने को अस्तित्व में अविभाज्य रूप में हैं” ऐसा जाने, माने, पहचाने और निर्वाह करें। यह एक ही विधि है। भ.व. (290-292)

मानव जागृति विधि से ही धरती संतुलित रहना

मानव परंपरा जब से जागृत परंपरा के रूप में प्रामाणिक हो जावेगी, उसी मुहूर्त से नैसर्गिक और वातावरण संतुलन के लिए जागृति होना स्वाभाविक हैं। जैसे ईंधन (ऊर्जा) स्रोतों को उपयोग करने के क्रम में और इनके उपयोग के तादाद तरीके के आधार पर ही पर्यावरण संबंधी समस्या ग्रस्त होना अथवा समाधानित होना पाया जाता हैं। इस मुद्दे पर संतुलन का आधार ऊर्जा स्रोत के रूप में खनिज, कोयला और तेल को पहचाना गया। वह प्रदूषण के लिए सर्वाधिक कारक तत्व सिद्घ हुआ।

इससे यह ज्ञानार्जन होता है या मानव की समझ में आता है कि अन्य प्रकार के ऊर्जा स्रोतों से आवश्यक कार्य करना चाहिए।

ऐसी ऊर्जा स्रोत सूर्य ऊर्जा और प्रवाह शक्ति के रूप में बड़ी तादाद में दिखाई पड़ती हैं। इन दो स्रोतों को सर्वाधिक उपयोग करने की विधि को, तरीके को तत्काल खोज लेना चाहिए। इन दो स्रोतों में से प्रवाह शक्ति को, विद्युत चुम्बकीय शक्ति में परिवर्तित करना शीघ्र आरंभ करना चाहिए। फलत: खनिज तेल और कोयले को उपयोग करने की आवश्यकता न हो। इसी के साथ और ऊर्जा स्रोत जैसे - गोबर गैस, कचरा गैस के रूप में जो पहचाना गया, उसकी वृद्घि किया जाना चाहिए। जिससे ईंधन और मार्ग प्रकाश दोनों पूरा हो सके। इसी बीच में सौर ऊर्जा को उपयोग करने के उपकरणों का निर्माण और उसकी सुलभ उपलब्धियों के संबंध में सम्पूर्ण जन मानस को जागृत करना आवश्यक है।

इसी रूप में रासायनिक खाद का प्रयोग प्राकृतिक फल, फूल, पशुओं के प्रजाति के साथ खिलवाड़ सर्वथा बंद करना आवश्यक है। मानव इस धरती पर स्वस्थ रहने, चारों अवस्था संतुलित रहने के लिया यह अनिवार्य है। (अधिक जानकारी के लिया समाधानात्मनक भौतिकवाद पृ 327-340 देखें।)

जीवन ज्ञान, अस्तित्व दर्शन ज्ञान, मानवीयता पूर्ण आचरण ज्ञान, अखण्ड समाज, सार्वभौम व्यवस्था और सह-अस्तित्व सहज गति के द्वारा सहज रूप में ही, धरती में जो कुछ भी क्षति हुई हैं, वह पुनश्च अपने में भर जाने की एक व्यवस्था सह-अस्तित्व में रखी गई है। विश्व जन मानस में मानव परंपरा से हुई भूल सुधारने के लिए आवश्यकीय वास्तविक विचारों की एक आवश्यकता बनी ही रही। यह मध्यस्थ दर्शन, सह-अस्तित्ववाद, आवर्तनशील अर्थव्यवस्था, व्यवहारवादी समाजशास्त्र और मानव संचेतनावादी मनोविज्ञान के आधार पर मानव सुधार के लिए मानसिकता तैयार कर सकता है। यह मानव के लिए अर्पित हो चुका है।

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