अध्याय १ – अनुसन्धान

अनुसंधान क्यूँ, कैसे?

मेरे बंधुओं,

सबको नमन, प्रणाम, आशीर्वाद अर्पित करते हुए मैं आपसे अनुरोध करना चाह रहा हूं यह अनुसंधान क्यों और कैसे हुआ? उसके पहले मुझे यह भी बताने को कहा गया है यथास्थिति से मुझे क्या परेशानी थी? मैं मानता हूं यहां पर जितने भी बंधुजन उपस्थित हैं वे ध्यान से सुनेंगे और फिर अपने विचार व्यक्त करेंगे।

यथास्थिति यह है “इस धरती पर हम जो आदमी जाती है, वे ज्ञानी, विज्ञानी अथवा अज्ञानी में गण्य है।” यह मेरा कथन आप लोगों को कितना अनुकूल है या प्रतिकूल है यह आप आगे बताएँगे।

हम ज्ञानी, विज्ञानी और अज्ञानी मिलकर इस धरती पर जो कुछ भी किए उसके फलन से पहले वन संपदा समाप्त हो गई, दूसरे खनिज संपदा समाप्त हो गई। इन दोनों के समाप्त होने से यह धरती रहने योग्य नहीं बचेगी, ऐसा विज्ञानी लोग कह रहे हैं। यह सब बात हम सब लोग सुनते ही हैं। इस पर आगे सोचने पर स्वयंस्फूर्त रूप में यह बात आती है हम जो कुछ भी किए उससे यह धरती रहने योग्य नहीं बची अब यह रहने योग्य बने उसके लिए भी कुछ सोचें!

धरती पर मानव रहने योग्य कैसे बने उसके लिए मैं अनुसंधान किया हूं। मेरे अनुसंधान का उद्देश्य इतना ही है।

इस अनुसंधान पूर्वक मैंने जो पाया, उसको प्रस्तुत करने की कोशिश किया है। यह स्पष्ट हुआ या नहीं हुआ, यह आप ही लोग शोध करके बताएँगे। हर व्यक्ति को शोध करने के अधिकार है, समझने का अधिकार है, उस पर अपने आचरण सहित विचार को व्यक्त करने का अधिकार है। आज पैदा हुआ बच्चे में भी यह अधिकार है कल मरने वाला वृद्ध में भी यह अधिकार है। प्रकारान्तर से चलते हुए वर्तमान में हम मानव जाति अपराध कृत्य में फंस गए हैं। इससे पहले हमारे बुजुर्गों ने लिख कर दिया है “भक्ति विरक्ति में कल्याण है।“ भौतिकवाद जब आया तो पहले से ही प्रलोभन से ग्रसित मानव जात “सुविधा संग्रह” में फंस गया।

सुविधा संग्रह के चलते इस धरती से वन और खनिज दोनों समाप्त होते गए। वन और खनिज समाप्त होने से ऋतु संतुलन प्रतिकूल होता गया और धीरे-धीरे धरती बीमार हो गई।

विज्ञानी यह बता रहे हैं धरती का तापमान कुछ और बढ़ जाने से इस धरती पर आदमी रहेगा नहीं। सन 1950 से पहले यही विज्ञानी बताते रहे कि यह धरती ठंडा हो रहा है। सन् 1950 के बाद बताना शुरू किए यह धरती गरम हो रहा है। यह कैसे हो गया? इसका शोध करने पर पता चला कि इस धरती पर सब देश मिलकर 2000 से 3000 बार परमाणु परीक्षण किए हैं। ये परीक्षण इस धरती पर ही हुए हैं। इन परीक्षणों से जो ऊष्मा जनित होते है उसको नापा जाता है। यह जो ऊष्मा जनित हुआ, वह धरती में ही समाया या कहीं उड़ गया? यह पूछने पर पता चला यह धरती में ही समाया है, जिससे धरती का तापमान बढ़ गया। धरती को बुखार हो गया है।

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