अध्याय 2 - आगे अध्ययन हेतु संकेत
अध्ययन क्यों?
धरती बीमार हो गई है, प्रदूषण छा गया है, अपना पराया का दीवाल बढ़ गया है…. मानव को यदि इस धरती पर रहना है, तो समझना ही पड़ेगा, जागृत होना ही पड़ेगा। सुखी होने के लिए समाधानित होने के लिए व्यवस्था में जीने के लिए धरती चारों अवस्था संतुलित रहने के लिए अध्ययन करना ही होगा, न्याय दह्र्म सत्य को समझना ही होगा, जागृत होना ही होगा, अनुभव करना ही होगा, प्रमाणित करना ही होगा - दूसरा कोई रास्ता ही नहीं है। (संवाद)
अध्ययन क्या है ?
परिभाषा
अधिष्ठान के साक्षी में स्मरण पूर्वक किया गया, क्रिया प्रक्रिया एवं प्रयास।
श्रवण - मनन - साक्षात्कार की संयुक्त प्रक्रिया ही अध्ययन है।
हर शब्द का अर्थ है। उस अर्थ के स्वरूप में अस्तित्व में वस्तु (वास्तविकता) को पहचानना, समझना, वस्तु के साथ हमारा कल्पनाशीलता ‘तदाकार’ होना ।
- (परिभाषा संहिता, अभ्यास दर्शन)
- व्याख्या
- अध्ययन के चरण इस प्रकार हैं:-
- परस्परता में विश्वास (अध्ययन कराने वाले के प्रति)
शब्द के अर्थ को सुनना
अर्थ को समझने के लिए मन को लगाना
अर्थ रूपी वस्तु को समझना
- समाधान = जागृति = मानव चेतना