वृत्ति के अनुरूप; वृत्ति चित्त के अनुरूप; चित्त बुद्धि के अनुरूप; बुद्धि आत्मा के अनुरूप; आत्मा अस्तित्व सहज सहअस्तित्व के अनुरूप कार्य करने की स्थिति में और गति में प्रमाणित होता है। इसलिए चित्त के अनुरूप वृत्ति में तुलन और विश्लेषण संगीतीकरण विधि से शांति सहज प्रमाण को देखा गया है। बुद्धि के अनुरूप कार्य करता हुआ चिंतन और चित्रण सत्यबोध सहज कार्यप्रणाली और प्रक्रिया में संगीतीकरण स्वयं संतोष के रूप में प्रमाणित होना पाया गया है। बुद्धि, आत्मानुरुपी विधि से कार्यकलापों को संपन्न करती है तब परम संगीत, आनंद के नाम से ख्यात होता है। आत्मा में सहअस्तित्व के अनुरूप कार्य होना सहज है। यह सहजता मानवीयता पूर्ण प्रामाणिकता सम्पन्न परम्परा की महिमा से सर्व सुलभ होता है। दूसरा, अनुसंधान विधि से भी संपन्न होता है। इस प्रकार बलों में संगीतीकरण प्रणाली से मनः स्वस्थता का प्रमाण और शक्तियों में संगीतीकरण प्रणाली से नैसर्गिक संतुलन, अखंड समाज में संतुलन, सार्वभौम व्यवस्था में संतुलन, मानवीय शिक्षा-संस्कार, स्वास्थ्य-संयम सहित न्याय सुलभता, उत्पादन सुलभता, विनिमय सुलभता सम्पन्न संस्कृति, सभ्यता, विधि व्यवस्था में संतुलन संभव है। इसे प्रमाणित करने के क्रम में ही “मानव संचेतनावादी मनोविज्ञान” की सहज प्रस्तुति है।

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