2. विश्वासघात के ही स्वरुप में दंभ, पाखंड पूर्वक जन-मन चाहे आश्वासनों के आधार पर गद्दी में बैठे हुए आदमी को हटा दिया है।
3. वंशानुगत अधिकार के अंतर्गत गद्दी पर बैठ गया। ऐसा सर्वाधिक घटनाओं में गद्दी पर बैठा हुआ आदमी मरने लगा है, मरने की तैयारी में है अथवा मर गया है। ऐसी स्थिति में वंशानुगत विधि से, गद्दी में बैठने की घटनाओं को देखा गया।
4. गद्दी पर बैठा हुआ आदमी स्व प्रसनन्ता से दूसरे व्यक्ति को बैठाया।
इतिहास के अनुसार ऐसे, विविध घटना क्रम स्मरण करने के लिए उपलब्ध हैं। इन्हीं चार विधियों से सत्ता को हस्तांतरित होते हुए देखा गया है और सत्ता हस्तांतरित हुई है । सत्ता प्राप्त व्यक्ति जो गद्दी में बैठा रहता है, उसका मूल रूप, मूल महिमा मूलत: विकरालता और सर्वाधिक सुविधा, यही रहते आया। शक्ति केन्द्रित शासन करने को सर्वाधिकार अथवा एकाधिकार से चली आई है।
शक्ति केन्द्रित शासन का तात्पर्य यही माना गया है कि संविधान लिखित या मौखिक, इन दोनों विधियों से पालन होना राज्य का तात्पर्य है, अर्थात् वैभव का तात्पर्य है। राज्य सत्ता का तात्पर्य यही है कि पालन न होने की स्थिति में उसे डंडा, बंदूक, तोप, प्रेक्षपण-विक्षेपण वध-विध्वंसात्मक कार्य करने का अधिकार हो। ऐसा मौलिक अधिकार गद्दी में बैठे हुए आदमी के पास होना या आदमी में होना मान लिया जाता है। इन्हीं से आबंटित पद अथवा नाम के रूप में होना परंपरा में देखा गया। उनके लिए प्रदत्त, सत्ता सहज अधिकार का तात्पर्य भी यही हैं। लोक जीवन, लोक कार्य, लोक व्यवहार अपनी जिम्मेदारी से होना है। अभी तक कोई शक्ति केन्द्रित शासन ऐसा देखने को नहीं मिला, जिसमें मानव का अध्ययन संपन्न शिक्षा और व्यवस्था में संरक्षण विधि को लोकगम्य कराने में कोई मार्गदर्शन किया हो। इसका कोई प्रमाण इतिहास में तथा वर्तमान में देखने और समझने को नहीं मिला।
शक्ति केन्द्रित शासन और विकेंद्रीकरण की बात बारबार सुनने में आई। एकाधिकारवादी राजगद्दी के समय भी इस प्रकार की बातें आईं एक से अधिक व्यक्तियों के साथ मिलकर निर्णय लेने पर सत्ता सहज अधिकारों का आबंटन मौखिक, लिखित रूप में हुआ। डराने, धमकाने, मारपीट करने के अधिकारों को आबंटित करने की प्रथा चली। ऐसे सभी काम आम आदमी के साथ ही करना था और आज तक इसे करते आए। वर्तमान में भी यही कर रहा है। कहीं बड़ी तादाद से ऐसे कर्मो को करना है, जैसे सीमा सुरक्षा और युद्घ की तैयारियाँ। यही आज तक देखा गया है। इसे सत्ता विकेन्द्रीकरण का रूप भी मान लिया गया है।