हैं। इसके बावजूद कुछ परिवार अपने पैसे से बीड़ी पिये है, शराब पिये है आदि का पक्षधर होना भी पाया गया है। इसका अध्ययन करने पर पता चलता है कि जो नशा करने वाले के आर्थिक अनुग्रह पर जीता हुआ परिवार है, उनमें से कुछ लोग इस प्रकार की वकालत करते हैं।
(8) समस्त तर्कों का उद्देश्य-व्यवस्था। नशाखोरी, व्यवस्था में सहायक नहीं है :-
इसमें मुख्य मुद्दा यह है कि इसमें बहुत सारा वार्तालाप हो सकता है। सारे वार्तालाप का उद्देश्य व्यवस्था एवं व्यवस्था में भागीदारी, मानवीयता पूर्ण आचरण है, यह निश्चित है। जो व्यवस्था में जीता है, ऐसे व्यक्ति में संतुलन सहज स्वाभाविकता बना ही रहता है। प्रकारान्तर से, कोई भी नशा करने के बाद असंतुलित होता ही है। इससे यह स्पष्ट होता है कि मानव के लिए नशाखोरी, व्यवस्था में सहायक नहीं है। नशा उन्मादों को बढ़ाता है, घटाता नहीं है और प्रत्येक उन्माद अव्यवस्था है। नशा स्वयं उन्माद है।
(9) आसव की दो विधियाँ: शराब का जो आसवन व आसवीकरण है, इससे कार्य-व्यवहार प्रभावित होता है- यह (नशा) व्यवस्था सम्मत नहीं है :-
आदमी नशा करके शांत बैठा है इसमें क्या अतंर है? इसका सटीक विश्लेषण करने के लिए आज की स्थिति बड़ी अनुकूल है। दूध और शराब को, उनमें समाहित वस्तुओं के आधार पर स्पष्ट होता है। मद्य, एक किसी मीठा वस्तु को सड़ाने के उपरान्त आसवन क्रिया से प्राप्त वस्तु है। आसव निर्माण की दूसरी विधि में किसी भी मीठी वस्तु को इसको अपने में, से, के लिए आसव के लिए बाध्य किये जाने पर उसमें मूल द्रव्य को पूर्णतया विकृत होने से बचाने के लिए अनुपाती विधि से, मद्य स्वयं से तैयार कर लेता है। मूल द्रव्य मद्य से संरक्षित रहता है। अत: यह औषधि के लिए उपयुक्त है।
पहली विधि से प्राप्त मद्य स्वाभाविक रूप में उन्माद को बढ़ाता है। इसलिए यह व्यवस्था में भागीदारी होने में अड़चन पैदा करता है, यह स्पष्ट है। शांत बैठे रहने का तात्पर्य, कुछ न करते हुए बनता है, कुछ न बोलते हुए भी बनता है, इसलिए शराब पिया हुआ व्यक्ति विचारशील नहीं हो ऐसा नहीं है। विचारशील रहता ही है, इसलिए विचारों में नशा का, शराब का असर रहता है। जब-जब कोई कार्य होगा, तब तब उसका प्रमाण होता ही है। अस्तु, व्यवस्था में भागीदारी पूर्वक, मानवीयता पूर्ण आचरण को व्यक्त करने के लिए सभी प्रकार का नशा बाधक है। कोई भी नशा इसमें सहायक नहीं है।
(10) दूध क्या है? जीवंत शरीर में निष्पन्न ममता सम्मत प्रेरित रस है :-