आवेशित (हस्तक्षेपित) स्थिति में अंतर्नियोजित ऊष्मा का दबाव इतना अधिक हो जावे कि जिससे नाभिकीय द्रव्य विस्फोटक स्थिति में पहुँचे।
यह अब तर्क संगत लगता है कि सूर्य में सर्वाधिक अजीर्ण परमाणु में आवेश तैयार हो गए। फलस्वरुप नाभिकीय विस्फोट होने लगा। उसका प्रभाव विस्फोट का आधार बना। इस ढंग से सूर्य में समाहित सभी द्रव्य, विस्फोट कार्य में व्यस्त हो गए। इसके पक्ष में आज के चोटी के विज्ञानी, इस धरती पर कहते हुए पाये गये है कि अभी जितना नाभिकीय विस्फोटक बनाम एटम बम आकाश में, धरती में और समुद्र में रखे गये है, उन में यदि विस्फोट हो जाएँ तब क्रमिक रूप में प्रत्येक परमाणु के नाभिकीय विस्फोट की स्थिति आ जाएगी।
एक और तरीके से कल्पना किया जा सकता है, इस धरती में ये विज्ञानी, नाभिकीय विस्फोट सिद्घांत को अच्छी तरह समझ गये हैं। उसका विस्फोट करने में पारंगत भी हो गए है, और उसके लिए तैयारी भी कर लिये हैं। इतना तो अपना जीता-जागता, देखा-भाला तथ्य है। अस्तु, सूर्य में स्वाभाविक रूप में, इस धरती के जैसे ही चारों अवस्थाओं का विकास हो चुका रहा हो। इस धरती में जैसा विज्ञानी अपनी महिमा वश, इस धरती को सूर्य जैसा बदलने के सारे उपाय कर लिये है, वैसे ही सूर्य में भी ऐसी तैयारी, विज्ञानी लोग किये हों? अभी यहाँ यह प्रयोग सिद्घ नहीं हुआ है। वहाँ यदि प्रयोग सिद्घ हो गया, तब उस स्थिति में यह कह सकते है कि श्रेष्ठतम विज्ञानी ही ऐसे कार्यों को संपन्न किये हो।
“जो मूल वस्तु जिस वस्तु से बना रहता है वह उसके मूल वस्तु के समान है” जैसे-
(1) मिट्टी से कितनी भी, कोई भी वस्तु बनावें, वह सब मिट्टी के समान ही हैं। उनका न तो मात्रात्मक परिवर्तन होता है, न ही गुणात्मक परिवर्तन होता है। परिवर्तन ही विकास या ह्रास को माना जाता है। पदार्थावस्था में जितने प्रकार की वस्तुएँ है, उनमें से अधिक वस्तुओं के संयोग से भी, वस्तुओं को बनाकर देखा जाए, तो भी संयोग में आई सभी वस्तुएं, मूल वस्तुओं के समान ही होते हैं।
(2) प्राण कोषाओं से बनी हुई अथवा रची हुई रचनाएँ अपने मूल रूप में वह प्राणकोषा के समान ही होता है। प्राणकोषाएँ मूलत: रासायनिक वैभव की अभिव्यक्ति है। रासायनिक मूल द्रव्यों का स्वरुप भौतिक पदार्थ ही हैं। रासायनिक परिवर्तन में एक से अधिक प्रजाति की तात्विक अणुएँ अपने निश्चित आचरणों को त्याग कर तीसरे प्रकार के आचरण के लिए तैयार हो जाते हैं। यह तभी तक उसी क्रियाकलाप में अपने को व्यस्त रख पाते है, जब तक भौतिकता का वर्तमान सानुकूल रहता है। जब