अपनी भ्रमित कल्पनाओं को सत्य समझना पाया गया। यथार्थता, वास्तविकता, सत्यता को सहअस्तित्व सहज वैभव के रूप में समझना और परीक्षण, निरीक्षण करना, सर्वेक्षण पूर्वक व्यवहार में सार्वभौमता को पहचानना संभव हुआ है। इस कार्य को मानव ही करता है। ऐसी स्थिति जब तक नहीं आएगी, तब तक मानव में जागृति का प्रमाण सिद्घ नहीं हो पाएगा।
अस्तु, इसका सहज उपाय है परिवार मूलक स्वराज्य व्यवस्था को समझें और अपनावें। इसको जीवन ज्ञान, अस्तित्व दर्शन ज्ञान, मानवीयतापूर्ण आचरण से सफल बनाएँ। जिससे ही यह धरती स्वर्ग होगी। मानव ही देवता होंगे। मानव ही देव कोटि में प्रमाणित होंगे। मानव धर्म अर्थात् सार्वभौम व्यवस्था, अखण्ड समाज सफल होगा। फलत: नित्य शुभ, समाधान, सुख, सार्थक सौंदर्य बोध सबको सुलभ होगा।
॥ नित्यम् यातु शुभोदयम् ॥
भूमि: स्वर्गताम् यातु, मनुष्यो यातु देवताम् ।
धर्मो सफलताम् यातु, नित्यम् यातु शुभोदयम् ॥