समझने की वस्तु तथा विधि
समझने की वस्तु
(क्या समझना है)
समझदारी के लिए, समाधान के लिए, सहअस्तित्व के लिए, सहअस्तित्व को समझना आवश्यक है। इसी शृंखला में, आगे निम्न बिंदुओं पर ध्यानाकर्षण किया गया है:-
- अस्तित्व में व्यवस्था (सहअस्तित्व)
- मानव (स्वयं) में व्यवस्था
- मानव संबंधों में व्यवस्था
- परिवार में व्यवस्था
- समाज में व्यवस्था
- प्रकृति (नैसर्गिकता) में व्यवस्था
समझने की विधि:
(इस प्रस्ताव को कैसे जाँचें)
यह प्रस्ताव
(अ) सार्वभौम है?
- (ब) सर्वकालिक है?
- (स) समझ सके ?
- (द) जीने में आता है?
- यही इसे जाँचने की विधि है।
(कैसे समझना है) = जांचना
“जाँचने” का तात्पर्य है: निरीक्षण, परीक्षण, सर्वेक्षण करना ।
निरीक्षण का मतलब वस्तु जैसा है, इसे वैसा ही स्पष्टता से समझना।
- <strong>परीक्षण</strong> का मतलब वस्तु के प्रयोजनों को समझना । क्यों हैं, इसे समझना ।
- <strong>सर्वेक्षण</strong> का मतलब कितना है? सभी जगह देखना। कितना है, सभी जगह जांचना ।